बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल के गन्ना किसानों का 90.43 करोड़ रुपये दबा लेने से चीनी मिल क्षेत्र के करीब 61 हजार गन्ना किसान संकट में पड़ गए हैं। इस मामले में एक माह पहले चीनी मिल अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में पुलिस ने न तो किसी की गिरफ्तारी की और न ही किसानों के बकाये का भुगतान हो सका।
पुलिस मिल पर बकाएदारी के हाई प्रोफाइल आरोपियों को कोई कार्रवाई न कर उन्हें बचाने के लिए जांच के नाम पर सिर्फ समय काट रही है। मोतीगंज थाने की पुलिस ने अभी तक हाई प्रोफाइल केस की जांच तक शुरू नहीं की है।
जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र के कुंदुरखी कस्बे में स्थित बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल ने इस पेराई सत्र में किसानों से 64.54 लाख क्विंटल गन्ने की खरीदारी की थी।
ल ने किसानों को करीब 1.77 अरब रुपये के सापेक्ष मात्र 57.88 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। चीनी मिल ने क्षेत्र के करीब 61 हजार गन्ना किसानों का 90.43 करोड़ रुपये दबा रखा है।
जिला प्रशासन ने अब तक कई नोटिस देने के साथ मिल के वाइस चेयरमैन व प्रबंध निदेशक कुशाग्र बजाज समेत छह अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कराया। मिल अफसरों के रसूख के आगे पुलिस बैकफुट पर है। पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
जब आरोपी हो हाईप्रोफाइल तो दरोगा कैसे काटे पर्चा
छोटे-मोटे मामलों में आम लोगों को थाना कोतवाली में तलब कर हाजिरी लगवानी वाली पुलिस की अमीर आरोपियों पर कार्रवाई करने में पुलिसिंग का तरीका बदल जाता है।
न्दुरखी बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल गन्ना किसानों का कई माह से करीब 90.43 करोड़ रुपये अधिक दबाए है। डीएम के आदेश पर एक माह पहले गन्ना विकास निरीक्षक विक्रम बहादुर सिंह ने मोतीगंज थाने में बजाज चीनी मिल के वाइस चेयरमैन एवं संयुक्त प्रबन्ध निदेशक कुशाग्र बजाज, डीएफओ वीपी अग्रवाल, ग्रुप ऑफ ऑपरेशंस एके गुप्ता, अध्यासी एवं वाइस प्रेसीडेंट आलोक श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रबंधक वित्त एवं लेखा एसएन शुक्ला व प्रबन्धक वित्त व लेखा धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ आपस में साठगांठ कर किसानों का आर्थिक शोषण करने, भुगतान न देकर किसानों के साथ धोखाधड़ी व विश्वासघात करने के अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर करने की मांग की।
मोतीगंज पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी करने, विश्वासघात व आपस में साठगांठ कर किसानों को आर्थिक शोषण करने, आवश्यक वस्तु अधिनियम व गन्ना अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
इस मामले को मोतीगंज पुलिस दबाए बैठी है। बजाज चीनी मिल के छह आरोपी हाई फ्रोफाइल अधिकारियों की पुलिस ने कभी गिरफ्तारी करने का प्रयास ही नहीं किया। यही विवेचना के नाम पर पुलिस सिर्फ समय काट रही है।
विवेचक ने इस केस में आज तक एक भी पर्चा नहीं काटा है। इस केस की विवेचना कर रहे एसआई विजय प्रताप सिंह का कहना है कि आरोपी कभी मिलते ही नही हैं। पता चलता है कि कोई नोएडा में है तो कोई लखनऊ में हैं। विवेचना आगे बढ़ाने के लिये गन्ना विभाग से कागजात नहीं मिला है।
जिला गन्ना अधिकारी गोंडा पीएन सिंह का कहना है कि बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल के सभी अफसरों को किसानों के बकाये गन्ना मूल्य भुगतान के बाबत कई बार निर्देश दिये जा चुके हैं, लेकिन मिल वाले भुगतान में देरी कर रहे हैं।
इस मामले में जिलाधिकारी ने बैठक कर चीनी अधिकारियों को जल्द भुगतान करने की चेतावनी दी है। बकाया भुगतान पर न चेते तो आरोपी जेल जाएंगे। विवेचना कर रहे दरोगा को तलब कर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
किसानों का बजाज चीनी मिल की बकाएदारी
कुल गन्ना खरीदा - 64.54 लाख क्विंटल
कुल देय गन्ना मूल्य- 1,77,43,28,000 रुपये
कुल देय पहली किश्त (230 रु.की दर) 1,48,32,10,000 रुपये
कुल चीनी उत्पादन - 6,72,227 क्ंिवटल
किसानों को किया भुगतान - 5788.52 लाख रुपये
मिल पर किसानों का बकाया- 9043.48 लाख रुपये
क्रय गन्ना मूल्य भुगतान तिथि- 30.12.2015
मिल क्षेत्र के कुल गन्ना किसान- 61,534
बजाज चीनी मिल पर कब क्या हुई कार्रवाई
अधिकारी समय कार्रवाई
डीसीओ - दिसंबर से मार्च 2016 तक - चार नोटिस
एसडीएम सदर- 17 फरवरी 2016 - एक नोटिस
डीएम - दिसंबर से फरवरी तक - 12 नोटिस
डीएम- 02 जनवरी 2016 - चीनी व शीरा स्टाक सीज
डीएम- 10 मार्च 2016 - मिल के एमडी समेत छह पर केस