गोंडा। सीएचसी बेलसर में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की संवेदनाहीनता का मामला सामने आया है। महिला सशक्तीकरण के सरकारी दावों की हवा निकालते हुए नसबंदी के बाद 60 महिलाओं को लाइन से फर्श पर लिटा दिया गया। यहीं नहीं इनको ठंड से बचाने को कंबल नहीं दिया गया। रातभर दर्द व ठंड से महिलाएं कराहती रहीं।
महिला सशक्तीकरण, महिला सुरक्षा और उनको बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच बेलसर सीएचसी में महिलाओं को ठंडी फर्श पर लिटाने की खबर प्रशासन के लिए शर्मसार करने वाली है।
बेलसर सीएचसी पर शनिवार को शिविर लगाकर 60 महिलाओं की नसबंदी की गई। नसबंदी के बाद इन महिलाओं को जमीन पर लिटा दिया गया। इन महिलाओं को सरकारी कंबल नहीं दिया गया।
महिलाओं को जमीन पर लेटा कर नसबंदी कराई जा रही है। लापरवाही का आलम यह रहा कि नसबंदी के बाद महिलाओं को उसी हालत में जमीन पर लेटा दिया गया। शिविर में 70 महिलाओं ने नसबंदी के लिए पंजीकरण कराया था। दस महिलाओं के गर्भवती होने से 60 लोगों की नसबंदी कराई गई। इन महिलाओं को जमीन पर ही लाइन से लेटा दिया गया।
सीएचसी पर लगे नसबंदी शिविर में कोविड नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। नसबंदी के दौरान सैकड़ों की भीड़ थी, जिसमें न तो डॉक्टरों ने मास्क लगा रखा था न ही मरीजों व उनके परिजनों ने मुंह ढक रखा था। वहीं नसबंदी के बाद इन महिलाओं को एक दूसरे से सटाकर जमीन पर लिटाया गया था जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
सीएचसी अधीक्षक सतपाल सोनकर ने कहा कि सीएचसी में तीस बेड की सुविधा है। शिविर में 60 महिलाओं की नसबंदी कराई गई जिस पर बेड न होने से फर्श पर गद्दा डालकर महिलाओं को लिटाया गया था। सीएमओ राधेश्याम केशरी ने बताया कि लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिक संख्या में महिलाओं की नसबंदी होने से कुछ समस्या हुई है। एसडीएम कुलदीप सिंह ने महिलाओं को फर्श पर लेटाया जाना गलत बात है। अगर स्थायी बेड नहीं थे तो चारपाई की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। सीएचसी अधीक्षक से प्रकरण की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।