गोंडा। स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियान का सकारात्मक असर नजर आने लगा है। परिवहन विभाग की सक्रियता के चलते जिले में संचालित 899 स्कूली वाहनों में से अब तक 554 स्कूली वाहनों का विवरण पोर्टल पर ऑनबोर्ड कर दिया गया है। इससे इन वाहनों की ऑनलाइन निगरानी संभव होने से बच्चों की सुरक्षा चुस्त दुरुस्त हो सकेगी।
अमर उजाला द्वारा 6 अप्रैल से शुरू किए गए कितना सुरक्षित आपका बच्चा अभियान को परिवहन विभाग ने पूरी गंभीरता से लेते हुए जांच व निगरानी के लिए फील्ड में टीमें उतारीं। विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों में पहुंचकर वाहनों का सत्यापन किया और उन्हें पोर्टल से जोड़ा। इसके साथ ही जो वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। इस कार्रवाई के बाद चेते कई स्कूलों के प्रबंधन ने खुद आरटीओ कार्यालय पहुंचकर अपने वाहनों को ऑनबोर्ड कराने की प्रक्रिया पूरी कराई। अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर खास तौर पर जागरूक व सजग हुए। अभिभावक मिथलेश शुक्ला ने बताया कि अब वह रोज बच्चे को वाहन में बैठाने से पहले उसकी स्थिति, ड्राइवर की पहचान और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच करती हैं।
क्यूआर कोड से मिलेगी पूरी जानकारी
वाहनों के ऑनबोर्ड होने के बाद परिवहन विभाग प्रत्येक वाहन पर एक क्यूआर कोड चस्पा कर रहा है। अभिभावक इस कोड को स्कैन कर वाहन से जुड़ी पूरी जानकारी जैसे सीट क्षमता, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, निर्धारित गति सीमा और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति आसानी से जान सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ ही लापरवाही की गुंजाइश भी कम होगी। वहीं कुछ स्कूलों ने तो अभिभावकों के साथ सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस भी साझा किया है। इससे अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों और यात्रा के दौरान की स्थिति पर भी घर बैठे सीधे नजर रख पा रहे हैं।
जागरूकता से हुआ बदलाव
सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. प्रेमकुमार सिंह का कहना है कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा केवल प्रशासन या स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों को भी जागरूक और सतर्क रहना चाहिए। सामूहिक प्रयास से ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। अभिभावकों के जागरूकता से बदलाव हुआ है।
स्कूलों में जाकर किया गया ऑनबोर्ड
एआरटीओ आरसी भारतीय ने बताया कि विभागीय टीमों की तरफ से लगातार स्कूलों में जाकर संचालित स्कूली वाहनों को ऑनबोर्ड किया जा रहा है। शेष बचे वाहनों को भी जल्द ही पोर्टल पर पंजीकृत कर लिया जाएगा, जिससे विभाग और अभिभावक दोनों ही स्कूली वाहनों की निगरानी कर सकेंगे।