गोंडा। बाढ़ के कहर से 150 गांवों को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश शासन गंभीर है। अभी से ही बांधों के मरम्मत और सुरक्षा कार्य के प्रयास शुरू कर दिए हैं। सिंचाई विभाग की ओर से 20 प्रकार के कार्य प्रस्तावित किये गये थे। जिन्हें स्वीकृति मिल गई है।
करनैलगंज में बने एलगिन-चरसड़ी तटबंध और भिखारीपुर- सकरौर तटबंध को मजबूत बनाने और सुरक्षित करने के लिए 49 करोड़ 57 लाख का बजट जारी किया गया है। इसके आधार पर निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सात जनवरी तक निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होगी और अप्रैल तक काम पूरे कराने का लक्ष्य तय किया गया है। बाढ़ के कहर से हर साल डेढ़ लाख से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।
करनैलगंज में बने एलगिन-चरसड़ी तटबंध और भिखारीपुर-सकरौर तटबंध के कमजोर होने से बारिश के समय उनके कटने की संभावना बनी रहती है। इसकी रिपोर्ट पर शासन ने बड़े स्तर पर कार्य कराने के लिए बजट जारी कर दिया है।
जिससे बंधों को मजबूत बनाया जाएगा और उनसे गांवों की सुरक्षा के उपाय किये जाएंगे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो समय से कार्य हो जाने से बाढ़ के समय ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। वैसे नदी के रुख को देेखते हुए हमेशा कार्य की जरूरत बनी रहती है। फिलहाल बांधों की सुरक्षा से ही गावों में बाढ़ का पानी जाने से रोका जा सकता है।
जारी किये गये बजट में कई तरह के काम होने हैं। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बांध को नदी से बचाने की है। इसके लिए एलगिन चरसड़ी तटबंध के किमी 35.850 पर स्पर का निर्माण चार करोड़ सात लाख से होगा। इसी बांध पर किमी 35.865 से किमी 36.035 तक बोल्डर रिवेटमेंट व परक्यूपाइन लगाने का कार्य तीन करोड़ 10 लाख से होगा।
इसी तरह एक और स्पर के निर्माण पर तीन करोड़ 18 लाख व एक और बोल्डर रिवेटमेंट के निर्माण पर तीन करोड़ 75 लाख का बजट खर्च होगा। इसके अलावा दो स्थानों पर रेगुलेटर निर्माण पर एक करोड़ 80 लाख का बजट खर्च होगा।
इसी बांध को चार स्थानों पर मरम्मत करके सही करने पर छह करोड़ 83 लाख खर्च होने हैं। 61 लाख के बोल्डर मिर्जापुर से मंगाए जाने हैं। इसके अलावा भिखारीपुर सकरौर बांध पर इसी तरह के कार्य होने हैं। जिन पर 26 करोड़ 25 लाख खर्च होने हैं।
बांधों की सुरक्षा का कार्य सिंचाई विभाग बारिश से पहले ही पूरा कराने की तैयारी कर रहा है। मई के बाद बारिश होने या फिर पहाड़ी नालों से पानी छोड़े जाने से घाघरा का जलस्तर बढ़ता है। सबसे महत्वपूर्ण यह हो जाता है कि फिर बांध पर कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उस समय जरूरी कार्य ही हो पाते हैं। इसलिए समस्या के पहले ही बांधों की सुरक्षा का कार्य शुरू करने की तैयारी हो रही है। जिससे नदी के कटान से बांध को बचाया जा सके।