77 हजार बच्चों की सेहत से हो रहा खिलवाड़
गोंडा। जिले के 77 बच्चों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने को आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित योजनाओं का लाभ इन नौनिहालों को नहीं मिल रहा है।
अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि जिले के 50 हजार बच्चे कुपोषित तथा 27 हजार अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। इसका खुलासा वजन दिवस की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट ने बच्चों की सेहत में सुधार को लेकर प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शासन की तरफ से पांच वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने व उन्हे पूरक पोषहार उपलब्ध कराने के लिए आंगनबाडी केंद्रों का संचालन कर रही हैं। इन केंद्रों पर बच्चों को पूरक पोषाहार के साथ साथ पूर्व प्राथमिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है।
वर्तमान समय में जिले के 2913 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। इन केंद्रों पर 4.88 लाख बच्चों का पंजीकरण है। जिसमें से 2.38 लाख बच्चे जीरो से तीन वर्ष के हैं तथा 1.78 लाख बच्चों की उम्र तीन से पांच वर्ष तक हैं।
इन बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार के अलावा मार्निंग स्नैक के रुप में इमाइलेज रिच एनर्जी फूड और विनिंग फूड के रूप में पूरक आहार दिए जाने का दिया जा रहा है। इन सामग्रियों की खरीद में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
इन भारी भरकम धनराशि के खर्चों का लाभ बच्चों को मिल रहा है या नहीं इसकी तहकीकात के लिए सरकार ने दिसंबर माह में बच्चों का वजन कराने का निर्देश दिया था। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस का आयोजन कर बच्चों का वजन जांचा गया और उनके स्वास्थ्य के स्तर को परखा गया।
इस वजन दिवस की जो रिपोर्ट सामने आई है वह चौंकाने वाली है। दो श्रेणियो में तैयार की गई इस रिपोर्ट को पीली श्रेणी व लाल श्रेणी में बांटा गया है। पीली श्रेणी की रिपोर्ट में जिले में 50640 बच्चे कुपोषण के शिकार पाए गए हैं।
इन बच्चों में 29950 बच्चों की उम्र जीरो से तीन वर्ष के बीच है जबकि 20690 बच्चे तीन से पांच वर्ष के हैं। इसी तरह से लाल श्रेणी में 26795 बच्चे अतिकुपोषण के शिकार हैं। इस रिपोर्ट ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए संचालित की जा रही योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के ब्लाकवार आंकड़े पर एक नजर
ब्लॉक, कुपोषित बच्चे, अतिकुपोषित बच्चे
पंडरीकृपाल 2194 934
बेलसर 2101 1374
बभनजोत 4830 2070
छपिया 1990 1725
हलधरमऊ 3490 1813
इटियाथोक 2625 1554
झंझरी 2433 1860
करनैलगंज 2842 2086
कटरा बाजार 3975 2199
मनकापुर 1682 1517
मुजेहना 3496 1157
नवाबगंज 4433 1184
परसपुर 3948 1834
रुपईडीह 5780 2039
तरबगंज 2947 1513
वजीरगंज 1243 1316
शहर 728 620
योग- 50640 26795
रुपईडीह व बभनजोत ब्लॉक सबसे अधिक कुपोषित
गोंडा। वजन दिवस की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के रुपईडीह व बभनजोत ब्लाक में पोषण योजनाओं की प्रगति सबसे अधिक खराब है। रुपईडीह ब्लॉक में 5780 नौनिहाल कुपोषित की श्रेणी में हैं जिसमें 3618 बच्चों की उम्र तीन साल से कम है जबकि पांच वर्ष तक के 2062 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
इसी ब्लाक में 2039 बच्चे अतिकुपोषण की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इसी तरह से बभनजोत ब्लाक में 4830 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं जबकि 2070 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं।
अब पंजीरी से चल रहा काम
गोंडा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को पंजीरी के अलावा कुपोषण के शिकार बच्चों को मार्निंग स्नैक के रूप में इमाइलेज रिच एनर्जी फूड और विनिंग फूड दिया जाना हैं मगर शासन स्तर से इसकी आपूर्ति आवश्यकता से बेहद कम हो रही है। जिससे बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
बच्चों की उपस्थिति के आधार पर जिले से पोषाहार आपूर्ति की डिमांड भेजी जाती है। जिसमें से 60 फीसदी आपूर्ति ही मिल पाती है। इसी से काम चलाया जा रहा है। शासन स्तर पर मार्निंग स्नैक की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया संचालित है। इसलिए इस महीने अभी आपूर्ति नही हो पाई है।
दिलीप कुमार पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी