गोंडा। पंचायत चुनाव में पंचायत सदस्यों के पदों को हल्के में लेना अब प्रधानों को भारी पड़ रहा है। चुनाव में 3987 पंचायत सदस्यों के पद रिक्त रह गए हैं, ऐसे में 363 पंचायतें ऐसी हैं जहां का कोरम नहीं पूरा हो रहा है।
यहां के प्रधान अपने पद पर बने तो रहेंगे लेकिन पैदल ही रहेंगे। न तो वह खातों का संचालन कर सकेंगे और न ही पंचायतों की बैठक ही कर पाएंगे। उन्हें अभी इसके लिए लंबे समय तक इंतजार करना होगा।
पंचायत चुनाव के बाद अब जाकर शपथ ग्रहण के लिए कार्यक्रम का ऐलान हुआ है। पता चला कि कई पंचायत में दो तिहाई सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके। त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था में लोकतंत्र के सबसे छोटे पद के प्रति लोगों के बेरुखी से यह समस्या आ खडी हो गई हैं।
जिले की 1214 ग्राम पंचायतों में से 363 में ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या पूरी न होने ये पंचायत की सरकार का गठन संभव ही नही है। ऐसे में यहां के निर्वाचित प्रधानों को कुर्सी पर आसीन होने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।
अभी इन पंचायतों में प्रधान पद के दायित्वों का निर्वहन प्रशासक करेंगे। जिले में ग्राम पंचायत सदस्यों के 3987 पद रिक्त हैं। फिलहाल, 842 ग्राम पंचायतों में प्रधान व सदस्य 25 व 26 मई को वर्चुअल शपथ ग्रहण करेंगे। पहली बैठक 27 मई को होगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 15410 ग्राम पंचायत सदस्य, 1612 क्षेत्र पंचायत सदस्य व 65 जिला पंचायत सदस्य के लिए चुनाव हुए थे। जिले की 9 ग्राम पंचायतों में प्रधान व सदस्यों का कार्यकाल पूरा न होने के कारण चुनाव नहीं कराया गया। 1205 ग्राम प्रधान, 15293 सदस्य ग्राम पंचायत, 1612 बीडीसी व 65 जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव कराया गया।
इनमें से 9 ग्राम प्रधान, 122 बीडीसी व 9222 सदस्य ग्राम पंचायत निर्विरोध निर्वाचित हुए। जबकि, सदस्य ग्राम पंचायत के 3987 पदों के लिए नामांकन न होने से ये पद रिक्त रह गए। 1196 ग्राम प्रधान समेत 4835 पदों के लिए चुनाव हुआ। पंचायत सदस्यों के पद रिक्त रह जाने के कारण अब 842 पंचायतों की ही सरकार बनेगी।
जिले की पांच ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधानों का निधन हो चुका है। इनमें विकासखंड कर्नलगंज की ग्राम पंचायत धनावा, परसपुर में चरहुंआ, कटराबाजार में टेढ़ी, तरबगंज में गौहानी व नवाबगंज में ग्राम पंचायत नगवा की प्रधान शामिल हैं। इसके अलावा तीन बीडीसी के निधन से भी पद रिक्त है। ऐसे में इन गांवों का विकास कार्य बाधित होगा।