बोल बम के जयकारे को सजे शिवालय
सावन माह के पहले सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक आज से
एक माह तक चलेगा मेला
गोंडा। सावन माह के पहले दिन सोमवार पड़ने के कारण इसे बहुत ही पवित्र दिन माना जा रहा है। पूरे सावन माह शिवालयों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासकर सोमवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। इसके लिए शिवमंदिरों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। नगर में दुखहरन नाथ शिवमंदिर, वजीरगंज में बालेश्वरनाथ शिवमंदिर, करनैलगंज में बरखंडीनाथ तथा खरगूपुर में प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ शिव मंदिर में सोमवार को हजारों शिवभक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करेंगे। इसके लिए मंदिरों को सजाया सवांरा गया है।
खरगूपुर कस्बा से तीन किलोमीटर पश्चिम में पृथ्वीनाथ मंदिर है। बताया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव माता कुंती के साथ यहाँ रुके थे। इस एका चक्त्रसनगरी में एक राक्षस रहता था। जिसे अपने भोजन के लिए गाँव से एक व्यक्ति व एक बैलगाड़ी अनाज प्रतिदिन चाहिए था। यहाँ के लोगों ने प्रतिदिन एक आदमी व एक बैलगाड़ी अनाज भेजना शुरू किया। एक दिन जिस घर में माता कुन्ती रुकी थीं, उसी घर में एक माँ के इकलौते बेटे का नम्बर आ गया। उस बेटे की जगह माता कुंती ने अपने बेटे भीम को राक्षस के पास भेजा। राक्षस व भीम में घमासान युद्ध हुआ और अंत में उस राक्षस की भीम के हाथ मौत हो गई। राक्षस पूर्व में ब्राह्मण था। भीम को ब्रह्म हत्या लगा था। ब्रह्म हत्या से मोक्ष पाने के लिए भीम ने शिवलिंग की स्थापना करके पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि पृथ्वीनाथ मंदिर का शिवलिंग भीम द्वारा स्थापित है। मन्दिर में स्थापित साढ़े पांच फुट ऊँचा शिवलिंग काले-कसौटी केे दुर्लभ पत्थरों से निर्मित है। टीले पर स्थित इस मंदिर के बारे में जानकारों का कहना है कि मुगल साम्राज्य काल में उनके एक सेनापति ने पूजा-अर्चना की और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया। कालान्तर में खरगूपुर के राजा गुमान सिंह की अनुमति से यहाँ के निवासी पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण के लिए खोदाई शुरू करायी। उसी रात स्वप्न में पता चला कि नीचे सात खण्डो का शिवलिंग दबा हुआ है। इसके बाद पृथ्वी सिंह ने पूरे टीले की पुन: खोदाई करायी, जहाँ पर एक विशाल शिवलिंग उभर कर सामने आया। उन्होंने इसके बाद हवन के उपरान्त पूजन-अर्चन शुरू कराया। तभी से इसका नाम पृथ्वीनाथ मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और बड़ी संख्या में लोगों के आस्था का केंद्र बन गया। बताया जाता है कि लगभग तीन दशक पूर्व तत्कालीन सांसद कुँवर आनन्द सिंह के पत्र पर पुरातत्व विभाग की जाँच में पाया गया कि उक्त मन्दिर में स्थित शिवलिंग एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जो पाँच हजार वर्ष ईसा पूर्व का यानि महाभारत काल का है। लोगों का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से दर्शन पूजन व जलाभिषेक करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है। श्रावण मास के अवसर पर 10 जुलाई सोमवार से शुरू होकर एक माह तक मेले व जलाभिषेक कार्यक्त्रस्म को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए मण्डल मुख्यालय व आस-पास के थानों के अतिरिक्त स्थानीय पुलिस व पीएसी बल तैनात किये जाएँगे। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल की माँग की गयी है।