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2021 में आरक्षण से पंचायतों में दिखेगी 1995 की झलक

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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की तैयारियां तेज हो गईं हैं। 2021 के आरक्षण में 1995 की झलक दिखने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम पंचायत सदस्यों का प्रस्ताव पहली मार्च तक तैयार होना है।
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इस बार जो पंचायतें अब तक आरक्षित नहीं हुईं, उनको प्राथमिकता से आरक्षित किया जाना है। दो दिन चले प्रशिक्षण से तय हो गया है कि कौन सा गांव किस वर्ग के लिए आरक्षित है। पंचायत चुनाव के ग्रामीण स्तर के आरक्षण की अनंतिम सूची दो मार्च को प्रकाशित होगी। जिस पर दावे व निस्तारण के बाद अंतिम सूची का प्रकाशन 15 मार्च को किया जाएगा।
ब्लॉक प्रमुख व ग्राम सभा में कौन गांव किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, माना जा रहा है कि इसका निर्धारण हो चुका है। ब्लाक वार पंचायतों के आरक्षण का चार्ट भी दे दिया गया है। जिसमें तय हो गया कि किस ब्लाक में कितनी पंचायतें किस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी।
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शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तय कर दिया है। इसके साथ ही प्रधानों के पदों का भी आरक्षण शासन ने घोषित कर दिया है। अब किस ग्राम सभा में कौन सा गांव या वार्ड किसके लिए आरक्षित होगा, इसकी सूची जारी होना बाकी है। विकास भवन में पिछले तीन दिनों से यह जानने के लिए प्रधान चक्कर लगा रहे हैं। पंचायत राज विभाग हो या निर्वाचन कार्यालय। प्रधान व समर्थक उनसे लगातार संपर्क में बने हैं।
उत्तर प्रदेश में इस बार होने वाले त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में ऐसी क्षेत्र व जिला पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की जाएंगी जो पिछले पांच चुनाव में अब तक कभी आरक्षित ही नहीं हो सकीं। राज्य सरकार पंचायतीराज निदेशालय से मिले आंकड़ों और प्रस्तावों के आधार पर कुछ ऐसा ही फार्मूला तैयार करवाने में जुटी है।
पिछले पांच पंचायत चुनावों में चक्रानुक्रम का रोटेशन पूरा हो गया बावजूद इसके तमाम क्षेत्र व जिला पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए अभी तक आरक्षित ही नहीं हो सकीं। खासतौर पर क्षेत्र व जिला पंचायतों में वार्डों का आरक्षण तय करते समय तत्कालीन सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों ने अपनी सहूलियतों का ध्यान रखते हुए आरक्षण तय करवाया।
मगर इस बार ऐसा नहीं होगा। प्रदेश सरकार वर्ष 2015 से पहले के चार पंचायत चुनावों में खासतौर पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई सीटों की पड़ताल करवा रही है और इसी आधार पर इस बार के चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण होना है।
जिले में वैसे तो प्रधानों के साथ ही जिला पंचायत सदस्यों के 65, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 1612 और पंचायत सदस्य के 15410 पदों पर आरक्षण तय होना है, लेकिन सभी की निगाहें 1214 प्रधान के पदों पर टिकी है। यह सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसमें 469 पंचायतें अनारक्षित होंगी और इसके अलावा अन्य पदों को आरक्षित किया जाना है। अब सभी की निगाहें आरक्षण की स्थिति पर टिकी हैं। जिससे वह चुनाव की तैयारी कर सकें। माना जा रहा है कि प्रशिक्षणों के बाद यह स्थिति साफ हो गई है कि क्या स्थिति पंचायतों की होगी।
पंचायत निर्वाचन में एक करोड़ 6 लाख के करीब बैलेट की जरूरत जिले में हैं, जो आ गए हैं। सदस्य ग्राम पंचायत के लिए 27.11 लाख मतपत्र मिले। प्रधान पद के लिए 27.05 मतपत्र आवंटित हुए हैं। बीडीसी के लिए भी 27.09 लाख मतपत्र का आवंटन हुआ है।
सदस्य जिला पंचायत पद के लिए 26.99 लाख मतपत्र का उपयोग होगा। इससे चुनाव की तैयारी पूरी हो गई है। ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव एक साथ होने का अनुमान है।
चुनाव में प्रधान पद के लिए हरे रंग का मतपत्र प्रयोग किया जाएगा। ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए सफेद रंग का मतपत्र होगा। क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए नीले रंग का तो जिला पंचायत सदस्य पद के लिए गुलाबी रंग का बैलेट पेपर प्रयोग किया जाएगा।
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