गोंडा। देवीपाटन मंडल में जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के भुगतान की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 23 जुलाई तक मंडल के चार जिलों में कुल 39,833 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें से 19,051 पात्र महिलाओं को अभी भी भुगतान का इंतजार है, जो कुल का करीब 48 फीसदी है।
मंडल में कुल भुगतान प्रतिशत महज 52 फीसदी दर्ज किया गया है। मंत्रा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार गोंडा जिले की स्थिति मंडल में बेहतर रही। यहां 10,181 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए, जिनमें से 6,313 महिलाओं को प्रोत्साहन राशि मिली। गोंडा में 3,868 महिलाओं का भुगतान लंबित है, और जिले का भुगतान प्रतिशत 62 फीसदी रहा। भुगतान के मामले में श्रावस्ती मंडल में सबसे आगे है। यहां 6,213 संस्थागत प्रसव के सापेक्ष 4,149 महिलाओं को योजना का लाभ मिला, जो 67 फीसदी है। बलरामपुर में 8,363 संस्थागत प्रसव के मुकाबले 5,497 महिलाओं को भुगतान किया गया। यहां भुगतान प्रतिशत 66 रहा, जो श्रावस्ती के बाद दूसरा सबसे अच्छा है। सबसे खराब स्थिति बहराइच जिले की रही, जहां केवल 32 फीसदी भुगतान हुआ।
तकनीकी कारणों से भी रुक जाता भुगतान
प्रभारी अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. संतलाल पटेल ने भुगतान लंबित होने के कई कारण बताए। इनमें लाभार्थियों के बैंक खाते, आधार सीडिंग और दस्तावेज की अपूर्णता शामिल है। पोर्टल पर तकनीकी कारणों से भी कई मामलों में भुगतान रुक जाता है। ऐसे लंबित मामलों का सत्यापन कर भुगतान की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।
जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य
जननी सुरक्षा योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख मातृ स्वास्थ्य योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को प्रसव के दौरान 1400 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे डीबीटी के माध्यम से दी जाती है।