करनैलगंज (गोंडा)। बाढ़ ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। करनैलगंज तहसील के 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। करीब सात हजार बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं। एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। विभिन्न बैराजों से 3.36 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है।
ग्राम बेहटा के मजरे रेता पुरवा, चरपुरवा, पारा खास, चंदापुर किटौली के मजरे बिचला व धुसवा, ग्राम नकहरा व उसके मजरे तीरथराम पुरवा, शंभर पुरवा, दुलारे पुरवा, छांगुर लाल पुरवा, देवकिशुन पुरवा, राधेपुरवा, मछारन पुरवा, पुहिल पुरवा, अयोध्या पुरवा, सांवल पुरवा पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
ग्राम नकहरा में बुधवार रात घुटनों भर से अधिक पानी भर गया। ग्रामीणों के लिए दो नाव लगाई गई हैं। इनमें एक मोटरबोट और दूसरी साधारण नाव है। हालांकि मोटरबोट के लिए डीजल की व्यवस्था नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को नदी की धारा को पार करने के लिए करीब 40 लोग मोटरबोट पर सवार हो गए, लेकिन कोई नाविक ही नहीं था। ऐसे में ग्रामीण खुद मोटरबोट चलाते नजर आए।
ग्रामीणों ने बताया कि सभी लोग जानवरों के लिए चारा लाने के लिए पारा या बेहटा गांव जा रहे हैं। उधर ग्राम नकहरा, पारा, बेहटा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली के सामने से अब नदी की मुख्य धारा बहने लगी है।
ग्राम मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, घरकुइयां के सामने बांध और नदी के बीच कटान ने चिंता बढ़ा दी है। करीब 300 बीघे से अधिक जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। जब नदी खतरे के निशान से ऊपर हो और स्थिर जलस्तर का डिस्चार्ज तेजी से कटान कर रहा हो तो खतरा उत्पन्न हो जाता है। हालांकि बांध के आसपास कटान न होने से कुछ राहत है।
प्रभावित गांवों पर नजर
एसडीएम यशवंत राव का कहना है कि ग्राम नकहरा में ग्रामीणों को लंच पैकेट का वितरण कराया जा रहा है। अभी गांव में पानी घुसा है। बाढ़ से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों को बाढ़ प्रभावित गांव से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा गया है।
फसल काटकर पशुओं को खिला रहे बाढ़ पीड़ित
विश्नोहरपुर (गोंडा)। दत्तनगर के अहिरन टाड़ी में रामानुज व ओमप्रकाश के खेत में पानी भरने लगा। वह अपनी मक्के की कच्ची फसल काटते दिखे। पूछने पर रामानुज ने बताया कि बाढ़ का पानी खेत में तेजी से भर रहा है। फसल डूबकर खराब हो जाएगी। इस वजह से कच्ची फसल काटनी पड़ रही है। इसे पशुओं को हरे चारे के रूप में खिला देंगे।
साकीपुर चहलावा मजरा चारों तरफ पानी से घिर गया है। घर से नाव के सहारे लोग सड़क पर पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे आधा दर्जन स्कूली बच्चे नाव का इंतजार करते दिखे। पूछने पर लक्ष्मी, अंकिता, प्रिया व कोमल ने बताया कि नाव उस पार है। चलाने वाला कोई नहीं है। घर के बड़े लोग काम से बाहर गए हैं। घंटे भर बाद बच्चों के भाई सुनील व सुशील उधर से नाव लेकर आए तब छात्राएं घर पहुंचीं। यहां सरकारी नाव नहीं मिली है।
साकीपुर दत्तनगर मार्ग पर पियारे यादव का छप्पर बाढ़ में मिट्टी कटने से गिर गया। इससे उनका भूसा भी बह गया। दत्तनगर में ढेमवा जाने वाला वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बाड़ी व पाड़ी माझा के लोग पलायन करने लगे हैं। ब्योंदा माझा के सभी 15 मजरे बाढ़ से घिर गए हैं। बाजार से गांव जाने वाला मार्ग भी पानी की जद में आ गया है।