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राज्य शिक्षक पुरस्कार की दौड़ से 500 से अधिक शिक्षक बाहर

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गोंडा। बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार देने की तैयारी शुरू हो गई है। शासन ने पुरस्कार की योग्यता में ऐसे शिक्षकों को बाहर रखा है जो एनपीआरसी या एबीआरसी हैं अथवा इसमें कार्य कर चुके हैं। जिले में ऐसे 400 से अधिक शिक्षक हैं जो छोटे साहब बनने के चक्कर में एनपीआरसी और एबीआरसी रह चुके हैं या फिर अभी कार्य कर रहे हैं।
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विभाग ने ऐसे लोगों को चिह्नित भी कर लिया है। इसके अलावा 100 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं जो विभिन्न मामलों में विभाग की ओर से कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय समिति राज्य पुरस्कार के लिए शिक्षकों के नाम का चयन करेगी। 30 जून तक शिक्षक बीएसए कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद आवेदनों की जांच कराई जाएगी। मानक से बाहर मिलने वाले आवेदनों को समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। फिलहाल एनपीआरसी, बीआरसी और दागी शिक्षकों को पुरस्कार योजना में शामिल नहीं किया जा सकता है।

जिले के तीन हजार से अधिक स्कूलों में सात हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। जिले में 166 न्याय पंचायतों में सर्व शिक्षा अभियान की व्यवस्था से एनपीआरसी नियुक्त हैं और वे शैक्षिक कार्यों के साथ ही न्याय पंचायत के स्कूलों की व्यवस्था भी देखते हैं। इसके अलावा हर न्याय पंचायत में एक और शिक्षक एनपीआरसी के सहयोग के रूप में नामित है। अभी हाल ही में कुछ एनपीआरसी के चयन में बदलाव हुआ तो कुछ नए शिक्षक भी एनपीआरसी बन गए हैं। इसके साथ ही हर ब्लॉक में चार से पांच सह समन्वयक (एबीआरसी) भी बीते साल तैनात हुए हैं। इनकी संख्या 80 के आसपास है और नए चयन से पहले भी ऐसे एबीआरसी हैं जो तीन से पांच साल तक कार्य कर चुके हैं। इस तरह करीब 400 शिक्षक तो विभाग के इस नियम से ही राज्य शिक्षक पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
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इसके अलावा 100 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से विभाग की ओर दंडित हो चुके हैं। मसलन निलंबन, वेतन वृद्धि अवरुद्ध होना या फिर वेतन काटने की कार्रवाई जैसे मामले में फंस चुके हैं। कई तो निलंबन के बाद चेतावनी या फिर लघु दंड पर बहाल किए गए हैं। मगर वे भी पुरस्कार की दौड़ में शामिल नहीं हो सकते। इस तरह जिले के 500 से करीब शिक्षक शुुरूआत में ही राज्य शिक्षक पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए हैं। किसी ने कोई तथ्य छिपाकर आवेदन भी किया तो 30 जून के बाद आवेदनों की 15 दिन तक होने वाली पड़ताल में मामला सामने आने पर कार्रवाई भी होगी। पुरस्कार की संस्तुति पर पहले से ही रोक लगा दी गई है।

शिक्षकों के कार्य से मिलेगा पुरस्कार
शिक्षकों को इस बार पुरस्कार सिफारिशों पर नहीं मिलेगा। कारण स्कूली शिक्षा के लिए किए जा रहे कार्य अब किसी से छिपे नहीं हैं। ड्राप आउट की बात हो या फिर परीक्षा में छात्रों के परिणाम की। स्कूल में छात्रों की उपस्थिति और अब तो ग्रेडेड लर्निंग से बच्चों की क्षमता वृद्धि का डाटा भी ऑनलाइन है। ऐसे में आवेदन के समय भरे जाने वाली जानकारियों का ब्यौरा सहज ही विभाग के पास उपलब्ध है। नामांकन अभियान और शिक्षा कायाकल्प से भी सत्यापन संभव हो सकेगा। इसके अलावा शिक्षक डायरी से भी उनके रूटीन कार्यों की स्थिति बयां होगी। पांच साल के रिकार्ड खंगाले जाएंगे। ऐसे में वही शिक्षक सफल हो सकेंगे जिनका कार्य बेहतर है। जनसमुदाय में बेहतर छवि भी पुरस्कार की राह आसान करेगी।

डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में बनी कमेटी करेगी चयन
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में बनी कमेटी करेगी। कमेटी के सदस्य सचिव बीएसए हैं और जीजीआईसी की प्रधानाचार्य के साथ ही किसी शिक्षाविद् को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। डायट प्राचार्य को शिक्षाविद् को बतौर सदस्य नामित करना है। आवेदन जमा होने के बाद कमेटी आवेदनों की पड़ताल जुलाई में करेगी।

राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है। 30 जून तक आने वाले आवेदनों को एकत्र किया जाएगा और फिर खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से 15 जुलाई तक सत्यापन कराकर जिला स्तरीय कमेटी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।-मनिराम सिंह, बीएसए

राज्य शिक्षक पुरस्कार में योग्य शिक्षकों का ही चयन किया जाएगा। 15 जुलाई तक रिपोर्ट मिलने पर समिति की बैठक करके संस्तुति की जाएगी। 30 जुलाई तक बेसिक शिक्षा निदेशक को प्रस्ताव भेजा जाएगा। किसी भी गैर मानक का चयन नहीं होगा। -विनय मोहन वन, डायट प्राचार्य
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