रूपईडीह (गोंडा)। जिले में योजनाओं का गजब हाल है, एक योजना को पूरा करने से पहले ही वहीं पर दूसरी योजना शुरू कर दी। अब स्थिति यह है कि दोनो योजनाओं का बंटाधार हो रहा है और सरकारी बजट पानी में बह गया। कुछ ऐसा ही हाल पंडरी कृपाल के बेसियाचैन गांव का है, यहां के गरीब परिवारों को रोजगार देने के लिए चलाई गई योजना अब मवेशियों के हवाले कर दिया गया है। हुआ यह है कि सुपर मार्केट की तर्ज पर स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना से गरीबों के समूहों को बाजार मुहैय्या कराने की योजना वर्ष 2009-10 में चली थी। बेसियाचैन गांव में करीब 25 लाख की लागत से दुकानें बनाईं गईं थी। वर्ष 2011-12 में दुकानें बनाई गईं और अब वहीं पर गौ आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है। दुकानों को आश्रय स्थल के दायरे में कर दिया गया है। ऐसे में अब दुकानों का अस्तित्व तो समाप्त ही हो गया।
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना शुरू हुई तो जिले के दो लाख गरीबों को रोजगार मुहैय्या कराने का सपना दिखाया गया और दस हजार के करीब समूहों का गठन हुआ। ऐसे ही पंडरी कृपाल के बेसियाचैन गांव में भी वर्ष 2012 तक एक दर्जन से अधिक समूहों का गठन ग्राम्य विकास विभाग ने किया। गठन पर ही लाखों रुपये खर्च हुए। एक लाख से अधिक का बजट तो गठन और प्रशिक्षण पर खर्च कर दिए गए। इसके अलावा रिवाल्विंग फंड आदि पर भी लाखों रुपये खर्च किए गए। प्रत्येक सक्रिय समूह को 25-25 हजार रुपये का फंड दिया गया, इसके बाद बैंकों से लोन कराने की प्रक्रिया की गई। इसके साथ ही वे अपने रोजगार की शुरुआत गांवों में ही कर सकें, इसके लिए 21 दुकानों के साथ ही दो टीन शेड का निर्माण हुआ। इस योजना पर 25 लाख का बजट खर्च हुआ और योजना पूरी भी हो गई।
विभाग की लापरवाही से समूहों को दुकानों का आवंटन नहीं किया गया। इससे जहां ग्रामीण बाजार गुलजार होनी थी, वहां पर दुकानें जर्जर होती चली गईं। इसी बीच यहीं पर गौ आश्रय स्थल के स्थापना की मंजूरी देे दी गई। अब वहां पर निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण में भी मानक की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में न तो यहां बाजार ही लग पा रहा है और न ही गौ आश्रय स्थल का निर्माण ही सही ढंग से हो रहा है। इससे गांव के विकास को झटका तो लगा ही है, गौ आश्रय स्थल के निर्माण में गोलमाल भी हो रहा है।
पीला ईंटे लगाने से गौ आश्रय स्थल पर असर
गौ आश्रय स्थल के निर्माण मेें पीले ईंट का प्रयोग होने की शिकायत मिली है। वहां के ईंट इस बात की गवाही है कि ईंट कैसा लग रहा है। फिलहाल ऐसे निर्माण होने से गौ आश्रय स्थल की नींव ही कमजोर हो जाएगी। आने वाले दिनों में गौ आश्रय स्थल की उपयोगिता प्रभावी होने में भी संदेह है।
गौ आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा हूं, मै क्या कर सकता हैं। सरकारी योजना और भूमि भी सरकारी है। गौ आश्रय स्थल का निर्माण भी जरूरी है। -पारसनाथ, ग्राम प्रधान
गौ आश्रय स्थल का निर्माण प्राथमिकता में है जिससे किसानों को सुविधा दी जा सके। लेकिन किसी योजना को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। कहीं ऐसा हो रहा है तो पता किया जाएगा। -हरिश्चद्र प्रजापति, उपायुक्त मनरेगा