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56 दिनों में बेसिक शिक्षा के 1.57 लाख बच्चों में शैक्षिक विकास बढ़ा

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गोंडा। बेसिक शिक्षा के स्कूलों में ग्रेडेड लर्निंग (शिक्षा कायाकल्प) मुहिम में जिले को बड़ी सफलता मिली है। 4450 शिक्षकों को 5 दिनों की ट्रेनिंग के बाद 56 कार्य दिवसों तक स्कूलों में गतिविधियों का संचालन हुआ। दो हजार से अधिक स्कूलों में चले अभियान से 56 दिनों में ही प्राइकरी स्कूलों के कक्षा 1 से 5 तक के 1.57 लाख 155 बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में अमूलचूल सुधार हुआ है। बच्चों में स्कूल की किताबों को पढ़ने और उनमें अक्षर की पहचान की क्षमता के विकास में शिक्षकों ने अभियान में बड़े बदलाव किए। पूरे प्रदेश में गोंडा जिले को बेहतर स्थिति में शामिल किया गया है। बेसिक शिक्षा के निदेशक डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनिराम सिंह को पत्र लिखकर अभियान में बड़ी सफलता के लिए उन्हें व शिक्षकों को बधाई द है। बीएसए ने कहा कि अभियान में प्रशिक्षकों और शिक्षकों की भूमिका सराहनीय है।
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जिले के 4450 शिक्षकों ने 56 कार्य दिवसों में स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता की तस्वीर बदल दी। ग्रेडेड लर्निंग प्रशिक्षण से मिले टिप्स से कार्य करके 56 दिनों में प्राइमरी स्कूलों में पढने वाले 1.57 लाख नौनिहालों की शैक्षिक गुणवत्ता में बदलाव ला दिया। प्रदेश में अव्वल रहने में जिले के बीएसए व शिक्षकों के कार्यों की निदेशक ने सराहना की है। स्कूलों अभियान को लेकर कई तरह की भ्रम की स्थिति थी, आनलाइन डाटा की फीडिंग हर चरण की करनी थी। इसमें कार्यक्रम के 4 डीआरपी (जिला स्तरीय प्रशिक्षक) व 64 बीआरीपी (ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षक) ने अहम भूमिका मनाई और व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर शिक्षकों को जहां हर पल तकनीकी सहयोग दिया, वहीं स्कूलों का भ्रमण करके भी अभियान को रफ्तार दी। शिक्षकों ने भी समूहों में बंटे बच्चों की नवीन ढंग से शिक्षा देकर ऐसी स्थिति बनाई कि उनके शैक्षिक गुणवत्ता में विकास हुआ है।

हर प्राइमरी स्कूल के दो शिक्षकों को ग्रेडेड लर्निंग का प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें कक्षा- 1 व 2 के बच्चों का एक समूह था और इनके शैक्षिक विकास के लिए एक शिक्षक को प्रशिक्षित किया गया था, कक्षा 3 से 5 के बच्चों का अलग ग्रुप था। जिन्हें पढ़ाने के लिए अलग शिक्षक को प्रशिक्षित किया गया था। दोनो समूहों के बच्चों को स्कूलों में 56 कार्य दिवसों तक प्रशिक्षित किया गया और फिर परीक्षा भी कराई गई। वार्षिक परीक्षा के बाद बच्चों की परीक्षा ओएमआर शीट पर कराई गई। परीक्षा के परिणाम आने पर गोंडा का स्थान प्रदेश में अव्वल आया है। बीएसए ने बताया कि कक्षा 1 व 2 के 50 प्रतिशत बच्चों में शब्द व उससे अधिक पढ़ने की क्षमता का विकास हुआ है। इसके अलावा कक्षा 3 से 5 तक के 65 फीसदी बच्चों में बुनियादी पाठ पढ़ने की क्षमता का विकास हुआ है। यह एक अच्छा प्रदर्शन है।
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शिक्षकों के प्रयासों को मिली रफ्तार
बेसिक शिक्षा ने भले ही ग्रेडेड लर्निंग कार्यक्रम लागू किया था और बदलाव आए हैं। लेकिन शैक्षिक बदलाव के लिए शिक्षक पहले से भी खुद से प्रयास कर रहे थे। अभियान आने से स्कूलों में शिक्षा के लिए काम कर रहे शिक्षकों की पहल को भी रफ्तार मिली। स्थिति यह रही कि कम समय ही बड़ी सफलता की ओर विभाग के कदम बढ़ गए हैं। माना जा रहा है कि जुलाई से कई नई मुहिम शुरू होनी है।
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