पीड़ित दलितों को नहीं मिल रही सरकारी मदद
गोंडा। अत्याचार से उत्पीड़ित अनुसूचित जाति व जनजाति के व्यक्तियों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है। 207 पीड़ित दलितों की आंखों के आंसू समाज कल्याण विभाग चाह कर नहीं पोछ पा रहा है।
शासन से एक करोड़ 90 लाख रुपये मिले तो 207 पीड़ितों को आर्थिक सहायता समाज कल्याण विभाग दे पाएगा। इसके अलावा विभाग को जिला प्रशासन की देनदारी भी चुकानी है।
समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों पर अत्याचार के मामले में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराता है। बीत रहे वित्तीय वर्ष में विभाग को शासन से सिर्फ 61 लाख रुपये का बजट शासन से मिला था।
यह बजट नाकाफी था। अत्याचार के मामलों में मदद के लिए विभाग को फरवरी माह तक 4 करोड़ 12 लाख 57 हजार रुपये की जरूरत थी। लेकिन सिर्फ 61 लाख बजट होने से पीड़ितों की मदद संभव नहीं था।
विभाग ने इसके लिए जिला प्रशासन से मांग किया जिस पर जिलाधिकारी के प्रयास से कोषागार नियम - 27 से विभाग को 3 करोड़ 51 लाख 57 हजार रुपए धनराशि दी गई।
जिसके बाद फरवरी माह तक 4 करोड़ 12 लाख 57 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया। इसके बाद भी बजट की कमी के कारण 207 पीड़ित को आर्थिक सहायता नहीं दी जा सकी है।
समाज कल्याण मंत्री जिले के होने के बाद भी बजट नहीं मिल पाया। महत्वपूर्ण यह है कि मंत्री रमापति शास्त्री अनूसूचित वर्ग के ही हैं लेकिन पूरे साल बजट नहीं आ सका। इससे 207 उत्पीड़न के शिकार अनुसूचित वर्ग के लोग आर्थिक सहायता के लिए भटक रहे हैं।
आर्थिक सहायता के लिए कोषागार से लिए गए धनराशि के समायोजन और 207 पीड़ितों को सहायता के लिए बजट की मांग की है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि 5 करोड़ 41 लाख 57 हजार रुपये की मांग किया गया है। निदेशक को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराते हुए बजट की मांग की है।