फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में खसरा के 465 मामले पर महामारी विभाग के दस सालों के कार्यों की जांच के आदेश

विज्ञापन
विज्ञापन
एक साल में खसरे के 465 मामले, छह सीएचसी अधीक्षकों को नोटिस
विज्ञापन


गोंडा। जिले में आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने वाले स्वास्थ्य विभाग का महामारी विभाग कार्रवाई के दायरे में आ गया है। विभाग की लापरवाही से एक ही साल में खसरा के 465 मामले सामने आए।

डीएम ने इसे गंभीर मानते हुए महामारी विभाग के दस सालों के कार्यों की जांच सीएमओ को करने का आदेश दिया और तीन दिनों में पूरी रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही उन्होंने महामारी अधिकारी हसन इफ्तिखार का नवीनीकरण रोक दिया है।
विज्ञापन


सीएमओ को निर्देश दिए कि जिले में उनके दस वर्षों के कार्यों की जांच तीन दिन में करके उन्हें रिपोर्ट दें तथा उनकी संविदा का नवीनीकरण भी बिना उनकी परमीशन के नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने छह सीएचसी अधीक्षकों को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आंकड़ेबाजी का खेल करने वाले अधिकारियों पर जिलाधिकारी की निगाहें टेढ़ी हो गई हैं।

बुधवार को डीएम ने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के साथ अथवा अधिकारियों की जगह डीएम की मीटिंग अटेंड करने आए बाबुओं को मीटिंग से बाहर कर दिया।

मीटिंग में डीएम ने स्पष्ट कर दिया कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों में फर्जी आंकड़ेबाजी बन्द होनी चाहिए और उन्हें आंकड़ों से नहीं जमीन पर काम होने से मतलब है।

इसमें जो भी अधिकारी लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ वे सख्त से सख्त एक्शन लेगें। समीक्षा के दौरान जिले में एक वर्ष में खसरा के 465 मामले पाए जाने पर हैरानी व्यक्त की।

इसके अलावा नियमित टीकाकरण में फिसड्डी पसरपुर, इटियाथोक, बेलसर, रूपईडीह, कटरा बाजार, हलधरमऊ के प्रभारी चिकित्साधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब कर तीन दिन के अन्दर जवाब मांगा गया है।

मीटिंग में डीएम ने अधिकारियों के साथ या अधिकारियों के स्थान पर मीटिंग में आए बाबुओं को मीटिंग हाल से बाहर कर दिया तथा स्पष्ट चेतावनी दी कि उनकी मीटिंग में सिर्फ सम्बन्धित विभाग का अधिकारी ही आएगा और भविष्य में यदि कोई अधिकारी बाबू लेकर या बाबुओं को मीटिंग में भेजेगा तो वे इसे बेहद गम्भीरता से लिया जाएगा।

डीएम ने मीटिंग में कई प्रभारी चिकित्साधिकारियों से उनके क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए लक्षित बच्चों व महिलाओं की संख्या पूछी तो कोई भी प्रभारी चिकित्साधिकारी डीएम को जवाब नहीं दे पाए।
विज्ञापन


नाराज डीएम ने मीटिंग में ही सुधर जाने की नसीहत दी और अगली बार से पूरी तैयारी के साथ तथा सही रिपोर्ट के साथ आने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि योजना के बारे में वे सीधे सम्बन्धित अधिकारी से ही जवाब तलब करेगें इसलिए वे सब सही डाटा के साथ स्वयं उपस्थित होगें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें