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राशन, ईंधन व पानी के लिए तरस रहे बाढ़ पीड़ित

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करनैलगंज (गोंडा)। बीते डेढ़ माह से भीषण बाढ़ की तबाही के मध्य गुजर बसर कर रहे ग्रामीणों का दर्द बढ़ता जा रहा है। बुजुर्ग व बच्चे बीमार हैं तो कुछ के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। कमर से ऊपर तक भर पानी के बीच पशुओं के सामने चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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फसलें तबाह हो चुकी हैं और पीड़ित किसी तरह सुरक्षित स्थान की ओर निकल कर जीविका चला रहे हैं। गुरुवार को बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की मांग करने गये प्रधान प्रतिनिधि को तहसीलदार ने मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर भगा दिया।

पीड़ित ने प्रदेश स्तर के अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री को पत्र देकर संवेदनहीनता करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग की है। मामला ग्राम नकहरा का है। यहां के प्रधान प्रतिनिधि महेश गुप्ता द्वारा दिये गये प्रार्थना पत्र में कहा है कि सभी ग्रामवासियों के घरों में डेढ़ माह से बाढ़ का पानी भरा है।
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इतनी अवधि के बीच में प्रशासन द्वारा केवल एक बार राशन किट दिया गया है। जबकि बाराबंकी जिले की बगल की ग्राम पंचायत बेहटा में दो बार दिया जा चुका है। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए तहसीलदार करनैलगंज से राहत सामग्री वितरित कराये जाने की मांग की गई।

जिस पर वह भड़क उठे और गाली देते हुए कहने लगे कि नेतागीरी करोगे तो जेल भेजवा दूंगा। तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि आरोप पूरी तरह से निराधार है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, रही बात राहत सामग्री की तो पीड़ितों को दुबारा राहत सामग्री दी जाएगी।

त्रिपाल लगाकर टिके हैं पीड़ित
पाल्हापुर राहत केंद्र के पास सुरक्षित स्थान पर त्रिपाल लगाकर तथा पशुओं को लेकर पीड़ित टिके हैं। यहां इन्हें कभी राहत मिलती तो कभी वह भी नहीं।

पीड़ित राम सुमेर ने बताया कि अधिकारी कहते हैं कि वह अपने गांव चलें वहीं पर राहत दी जाएगी, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाके में किसी भी गांव में घुसना खतरे से खाली नहीं है। अब किसी तरह गांवों में जाने का रास्ता नहीं बचा है।

ग्रामीणों के बवाल करने पर मिला लंच
पाल्हापुर राहत केंद्र पर गुरुवार को सैकड़ों ग्रामीण व बच्चे भूखे पहुंच गए। यहां अधिकारियों व कर्मचारियों से लंच की मांग करने लगे।

जवाब मिलने पर पीड़ितों ने लाठी-डंडों से लैस होकर प्रदर्शन किया। बवाल देखते हुए उपस्थित कर्मचारियों व अधिकारियों ने ग्रामीणों को लंच पैकेट दिए। उसी लंच पैकेट को खाकर पीड़ितों ने अपनी भूख मिटाई।

बीमार बुजुर्ग को नहीं मिल रहा इलाज
प्रतापपुर गांव के रहने वाले दीनानाथ अपने परिवार के साथ गांव छोड़ चचरी के पास सुरक्षित स्थान पर त्रिपाल में गुजर बसर कर रहे हैं।

दीनानाथ पिछले दस दिनों से बुखार व बदन दर्द से तड़फ रहे हैं। उनके पास न पैसे हैं न इलाज कराने की व्यवस्था। पाल्हापुर राहत केंद्र से डाक्टरों ने जो दवाएं दी वह काम नहीं कर रही है। ऐसे में बीमार दीनानाथ टेंट में ही बिना दवा के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
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