गोंडा। भीषण गर्मी व चिलचिलाती धूप दिल के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। तीन दिन में 12 लोगों को दिल का दौरा पड़ा है। जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में अधिकांश की आयु 40 वर्ष से भी कम है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में पिछले चार वर्ष से कार्डियोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। डॉक्टरों की मानें तो गोल्डन ऑवर (एक घंटे के भीतर) उचित उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
पड़री कृपाल विकासखंड में तैनात सहायक समाज कल्याण अधिकारी विजय कुमार वर्मा (37) की रविवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। निर्वाचन में उनकी ड्यूटी बतौर पीठासीन अधिकारी लगी थी। ड्यूटी रिसीव करने जाते समय रविवार को गोड़वाघाट के पास उनकी तबीयत बिगड़ गई। शहर के एक निजी हृदयरोग विशेषज्ञ की क्लीनिक पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
तरबगंज के ताराडीह अहिरन पुरवा निवासी साहबराम उर्फ सहबू यादव (24) सोमवार को दोपहर में वोट डालने गए थे। बूथ से लौटते समय रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन एक निजी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान साहबराम की मौत हो गई। चिकित्सक ने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई।
तरबगंज क्षेत्र के मनहना अमेठियन पुरवा निवासी सुचेता देवी (55) सोमवार दोपहर एक बजे प्राथमिक विद्यालय पूरे भुआल में वोट डालने गई थीं। भीषण गर्मी की वजह से घर लौटते ही उन्होंने स्नान कर लिया। कुछ देर बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा। निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। उपचार के दौरान कुछ देर बाद सुचेता ने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि की।
रुपईडीह के पंडित पुरवा निवासी संतोष (24) सोमवार को धूप में क्रिकेट खेलने गए थे। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान संतोष की मौत हो गई।
पड़रीकृपाल के भटवलिया निवासी अर्पिता (19) की सोमवार रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। सम्मयदीन पुरवा निवासी सत्यदेव (24) को भी सोमवार रात दिल का दौरा पड़ा। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। रुपईडीह के पंडित पुरवा निवासी राजेश कुमार (31) की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वहीं, मेडिकल कॉलेज में चेस्ट पेन से पीड़ित पांच मरीजों को भर्ती किया गया है।
जिला अस्पताल (अब मेडिकल कॉलेज) में 30 अप्रैल 2020 को हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद से अभी तक किसी भी हृदय रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में चार साल से ये पद रिक्त है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण टीएमटी व टूडी इको मशीन होने पर भी हृदय रोगियों की जांच नहीं हो पाती है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. एजाज अहमद का कहना है कि भीषण गर्मी की वजह से हृदयाघात की संभावना बढ़ जाती है। डायरिया के दौरान ब्लड प्रेशर अनियमित होने से भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण फिजीशियन ईसीजी कराकर लक्षण के आधार पर परामर्श देते हैं। गंभीर स्थिति में रेफर कर दिया जाता है।