रुपईडीह (गोंडा)। जिले में होम्योपैथी चिकित्सा की स्थिति बहुत ही खराब है। 11 स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना तो है लेकिन इनका संचालन जर्जर भवनों में हो रहा है। दो स्वास्थ्य केंद्रों को छोड़कर और दूसरे विभागों के उन भवनों में संचालित किया जा रहा है, जो निष्प्रयोज्य घोषित कर रखे हैं। भवनों के साथ ही चिकित्सकों की कमी भी है, सिर्फ दो ही स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर की तैनाती है। बाकी फार्मासिस्ट के भरोसे हैं। जिससे मरीजों को होम्योपैथी चिकित्सा की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। 11 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सिर्फ दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। इससे कई दिक्कते हैं।
जिले में होम्योपैथी चिकित्सा की मांग तो है लेकिन विभाग की लापरवाही से स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ठीक नही है। लोग स्वास्थ्य केंद्रों तक इलाज के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें चिकित्सकों की कमी खलती है। कई बीमारियों के लिए लोग होम्योपैथी इलाज को कारगर मान रहे हैं। रुपईडीह के विजय तिवारी कहते हैं कि होम्योपैथी इलाज से जुकाम, स्टोन, बीमार, शरीर में दाने समेत कई गंभीर बीमारियों का इलाज काफी कारगर होता है। लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक ही नहीं मिल पा रहे हैं। राजेन्द्र नाथ मिश्र कहते हैं कौडिया बाजार का होम्योपैथी अस्पताल काफी बेहतर संचालित है, 100 से 125 मरीज हर दिन आते हैं। लेकिन अकेले फार्मासिस्ट है, यहां की मूल समस्या भवन है। दो कमरों की छत ढह चुकी है और एक कमरा व बरामदा भी जर्जर है। बारिश में टपकता है। इसी तरह लल्ला पांडेय कहते हैं कि प्रशासन को होम्योपैथी स्वास्थ्य केंद्रों की तरफ ध्यान देना चाहिए। इस तरह होम्योपैथी इलाज के लिए लोग तो परेशान हैं लेकिन प्रशासन गंभीर नही दिख रहा है।
पांच निजी भवन व छह अस्पताल दूसरे भवनों में संचालित हैं
होम्यापैथी हॉस्पिटल जिले में 11 हैं लेकिन उनके पांच भवन ही हैं वह भी जर्जर हैं। कमरांवा, बखरवा, कोडवाशीर, जिगना बाजार और जिला अस्पताल में चल रहा है। यह स्वास्थ्य विभाग के भवनों में हैं जिसमें चार की स्थिति ठीक नहीं है कोई सुविधा भी नहीं है। जिला अस्पताल में एक कमरे में संचालित है। लोगों को यहां भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कैडिया, करनैलगंज, बेलसर, भोरहा, बभनजोत, दिनारा दूसरे भवनों में होम्योपैथी अस्पताल संचालित हैं।
कभी भी ढह सकता है कौडिया का होम्योपैथी अस्पताल
रुपईडीह ब्लॉक के कौडिया बाजार के पंचायत भवन में होम्योपैथी हॉस्पिटल तो है लेकिन फार्मासिस्ट राकेश कुमार गौतम के भरोसे संचालित है। पंचायत भवन का दो कमरा ढह गया है और एक कमरा व बरामद है लेकिन वह जर्जर है। यह कभी भी गिर सकता है। फार्मासिस्ट ने कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा है। यहां हर दिन 100 से 150 मरीज आते हैं लेकिन बरामद में बैठकर मरीज देखना खतरे से खाली नहीं है।
सिर्फ दो अस्पताल में ही है चिकित्सक की तैनाती
होम्योपैथी अस्पतालों की स्थिति बहुत की खराब है। जिला अस्पताल में तो डॉ. उर्मिला देवी की तैनाती है, इसके अलावा कोड़वा सीर में एक डॉ. करन सिंह हैं जिन्हें हफ्ते में एक दिन के लिए करनैलगंज में चिकित्सा करने की व्यवस्था की गई है। इस तरह होम्योपैथी इलाज काम चलाऊ व्यवस्था के भरोसे चल रही है। हर स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं।
डॉक्टरों के कमी की जानकारी शासन को दी गई है। भवनों की समस्या पहले से है। पंचायतों से सहयोग लेकर स्वास्थ्य केंद्रों को दुरुस्त कराने की कवायद की जा रही है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है। -डॉ. अनिल कुमार मिश्र, जिला होम्योपैथी अधिकारी