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गलत संगत से भटक रहे युवा और किशोर : मनोवैज्ञानिक

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गाजीपुर। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डाॅ. शिवकुमार बताते हैैं कि एक अच्छे घर से होने के बाद भी गलत संगत में आने से युवा और किशोर अपनी ऊर्जा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपने मार्ग से भटक जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है सोमवार को सनबीम स्कूल महराजगंज में। यहां दो छात्र किशोरावस्था में ही कानून को हाथ में लेकर अपने ही सीनियर छात्र के हत्यारोपी बन गए। डाॅ. शिवकुमार ने कहा कि आदित्य के पिता शिवजी ने जिन दोनों आरोपियों छात्रों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है, उनमें एक गाजीपुर घाट तो दूसरा आदर्श गांव हुसैनपुर निवासी का निवासी है। इसमें एक के पिता सरकारी शिक्षक तो दूसरे के डॉक्टर हैं, वे अपनी निजी क्लीनिक चलाते हैं। उन्होंने भी हर अभिभावक की तरह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सनबीम स्कूल महराजगंज में दाखिला कराया। लेकिन, संगत का ऐसा असर हुआ कि उनके बेटे स्कूल से लेकर बाहरी दुनिया तक अपने हिसाब से जीने की कोशिश करने लगे और अपने लक्ष्य से भटक गए। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि किशोरावस्था उत्तेजना, हलचल, रोमांच और जोखिम की उम्र होती है। मोबाइल की दुनिया से लेकर आस पड़ोस के व्यवहार उनको बदलाव के प्रति प्रेरित करते हैं। इस उम्र में समझदारी की कमी होते है। लेकिन ऊर्जा अधिक होती है। ऐसे में किशोर जल्दी आवेशित हो जाते हैं। सही तरीके से मार्गदर्शन की कमी से बच्चे गलत दिशा में चले जाते हैं। इस केस में भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। संगत के कारण छात्र गुटबंदी कर बैठे और लीडर बनने की चाहत में समझदारी की कमी से अपनी ऊर्जा का गलत इस्तेमाल कर दिए। उन्होंने कहा कि असामान्य व विचलित व्यवहार वाले किशोरों की पहचान कर उन्हें सुधारने के लिए कुशल परामर्शदाताओं की सहायता लेनी चाहिए। साथ ही विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी सभी को मिलकर निरोधात्मक उपाय अपनाने होंगे। यह विद्यालयों की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपने विद्यार्थियों को सही दिशा दें और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकें।
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* प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग हेतु काउंसलर की व्यवस्था होना चाहिए।
* असामान्य या विचलित व्यवहार वाले किशोरों को उनके अध्यापकों, साथियों, अभिभावकों द्वारा चिह्नित कर काउंसलर के पास भेजना चाहिए।
* परिवार और माता पिता द्वारा अपने बच्चों को व्यवहार की समुचित निगरानी की जानी चाहिए।
* समय पर समस्यगत मुद्दों पर सामूहिक परामर्श सत्र आयोजित करना चाहिए।
* अभिभावकों को अपने बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए।
* बच्चों में छिपी ऊर्जा को रचनात्मक रूप से प्रकट करने हेतु कला, खेल, शौक, स्काउट, या किसी संगठन आदि से जोड़ना चाहिए।
-नोट: डॉ शिवकुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर मनोविज्ञान, राजकीय महिला पीजी काॅलेज के सुझाव
व्हाट्सएप ग्रुप संचालित करता है गैंग-गाजीपुर। महराजगंज स्थित सनबीम स्कूल में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई इस तरह खूनी झड़प को लेकर हर कोई चर्चा कर रहा है। आखिर पढ़ाई-लिखाई की उम्र में किशोर कैसे कदम उठाने लगे हैं। मारपीट जैसी घटनाओं में पहले भी कई किशोरों के नाम सामने आते रहे हैं। कुछ महीने पहले पुलिस ने काफी हद तक कार्रवाई करते इस तरह के युवाओं के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। बताते हैं कि कुछ युवाओं का गैंग तक संचालित होता है। इसके सदस्य किसी युवक या किशोर से विवाद होने पर तुरंत अपने वाट्सएप ग्रुप पर संदेश भेज देते हैं। इस संदेश के बाद, केवल 15-20 मिनट के भीतर, गैंग के अन्य सदस्य विवाद स्थल पर पहुंचकर मारपीट कर निकल जाते हैं। पूर्व में इस गैंग के सदस्यों ने कई युवाओं को मारपीट कर घायल किया है।
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