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ट्रैक्टर की जद में आने से युवक की मौत

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सुहवल। थाना क्षेत्र के हमीद कालूपुर तिराहा के करीब शुक्रवार की रात ट्रैक्टर की जद में आने से बाइक सवार एक युवक की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक ट्रैक्टर-ट्राली छोड़कर फरार हो गया। सूचना पर पुलिस ने शव के साथ ट्रैक्टर-ट्राली को कब्जे में ले लिया। मृतक के भाई की तहरीर पर अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस तलाश में जुट गई।
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क्षेत्र के पटकनिया गांव निवासी कैलाश यादव का पुत्र उमेश यादव (37) जिला मुख्यालय स्थित एक ईंट भठ्ठा पर मुनीब का काम करता था। रोज की तरह वह अपने काम समाप्त होने के बाद बाइक से घर लौट रहा था। रात करीब दस बजे वह हमीद सेतु पार कर कालूपुर तिराहा के करीब ही पहुंचा था कि बालू लादकर आ रही ट्रैक्टर-ट्राली की जद में गया, जिससे गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों की सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। घायल को जिला अस्पताल भेजवाने के साथ ही दुर्घटना की जानकारी परिवार के लोगों को दी। कुछ ही देर में परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। जाते समय रास्ते में मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्मार्टम के लिए भेंज दिया। मृतक अपने चार भाइयों में सबसे छोटे एवं कमासूत था। मुनीबी कर किसी तरह परिवार की आजीविका चलाता था। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक संजय वर्मा ने बताया कि सड़क हादसे मृत उमेश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। ट्रैक्टर-ट्राली को भी घटनास्थल से कब्जे में ले लिया गया। मृतक के भाई सुरेंद्र यादव की तहरीर पर अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर उसकी तलाश शुरु कर दी गई है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बच्चों के सर से उठा पिता का साया
सुहवल। मृतक उमेश यादव की शादी करीब पांच वर्ष पूर्व करंडा के कोटियां गांव की सीमा से हुई थी। मृतक के दो पुत्री एवं एक पुत्र शिवानी (5), शिवम (3), एवं शिवांशी (2) है। पति की मौत पर पत्नी सीमा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। लोग जितना सांत्वना दे रहे थे, वह उतना ही बिलख रही थी। रोते-रोते कभी पूरी तरह से खामोश हो जा रही थी तो कभी बच्चों को सीने से लगाकर दहाड़े मारकर चीखने-चिल्लाने लगी थी। बिलखते हुए बार-बार यह कह रही थी कि बच्चों के सर से पिता का साया उठ रहा। अब वह किसके सहारे उनका पालन-पोषण करेगी। उसकी इस व्यथा को सुन ढांढस बंधाने वालों की आंखें भी नम हो जा रही थी।
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सर पर हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
सुहवल। सड़क हादसे में उमेश की मौत से जहां घर में कोहराम मच गया, वहीं गांववासियों में शोक की लहर दौड़ गई। दुख के बीच ग्रामीण आपस में यह बातें करते रहे ट्रैक्टर-ट्राली की जद में आने से उमेश के सर में गंभीर चोट लगी थी, जो उसके मौत का कारण बनी। उमेश हेलमेट पहना होता तो शायद उसके सर में गंभीर चोट नहीं लगी होती और उसकी जानी बच सकती थी, लेकिन शायद ऊपर वाले को कुछ और ही मंजर था।
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