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उत्पीड़न हो या न्याय की बात, महिला आयोग है साथ

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राज्य महिला आयोग की सदस्य शशि मौर्या ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वालंबन के तहत जुलाई महीने के पहले बुधवार को निरीक्षण गृह में पुलिस अधिकारी और अन्यअधिकारियों की उपस्थिति में सुनवाई किया।
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सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुसार महिला आयोग पूरी तरह से महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा एवं अन्य किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से न्याय दिलाने के लिए संवेदनशील है। साथ ही विकास के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं, बालिकाओं की भागीदारी मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आयोग में सुनवाई के दौरान महिलाओं की समस्याओं का गहन विश्लेषण कर अन्य संबंधित अधिकारियों के सहयोग से उचित कार्यवाही कर उसका समाधान करना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
सुनवाई के दौरान महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों का महिला थानाध्यक्ष को कार्रवाई कर न्याय दिलाने के निर्देशित किया गया। इसी क्रम में शशि मौर्या ने ग्राम पंचायत सिखडी में पहुंचकर जन चौपाल के माध्यम से उपस्थित ग्रामवासियों की समस्याओं का सुना तथा महिलाओं के उत्पीड़न के संबंध में किसी प्रकार की समस्या होने पर वन स्टाप सेंटर के माध्यम से निस्तारित करने का निर्देश दिया। उसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिखडी का स्थलीय निरीक्षण किया जिसमें चिकित्सको/कर्मचारियों मौके पर उपस्थित मिले ।वहां साफ सफाई एवं समय-समय पर मरीजों की देखभाल करने तथा स्वास्थ्य केन्द्र पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। इस दौरान ग्राम पंचायत भवन सिखड़ी पहुंचकर वृक्षारोपण महोत्सव के दूसरे दिन पौधरोपण भी किया।
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सात में से दो शिकायतों का निबटारा
वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से सात शिकायत पत्र प्रेषित किए गये जिसमें मौके पर दो का राज्य महिला आयोग की सदस्य द्वारा निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी किसी भी शिकायत को मौके पर जाकर सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण कराएं। यदि निस्तारण में किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो प्रशासन का सहयोग लेकर दोषी के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोई भी शिकायत मिलने पर तीन दिन के अंदर निस्तारण कराने का निर्देश दिया।
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