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Ghazipur News: जामवंत ने शक्ति याद दिलाई तो समुद्र लांघ गए हनुमान जी

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पाली गांव में रामलीला के दौरान सुग्रीव व बालि युद्ध का मंचन करते कलाकार। संवाद
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अति प्राचीनश्री रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में लीला के 14वें दिन मंगलवार को रामलीला मैदान लंका में बालि सुग्रीव युद्ध, हनुमान सीता मिलन तथा लंका दहन लीला का मंचन हुआ।
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इसके पूर्व कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, उप प्रबंधक मयंक तिवारी तथा कोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल कृष्णांश त्रिवेदी ने प्रभु श्रीराम लक्ष्मण की आरती की।
इसके बाद वंदे वाणी विनायकौ आदर्श श्री रामलीला मंडल के कलाकारों द्वारा लीला के शुरुआती दौर में बालि सुग्रीव लड़ाई प्रसंग का मंचन किया गया।
जिसमें प्रभु श्रीराम सीता जी का खोज करते हुए ऋष्य मूक पर्वत की ओर पहुंचे, जहां अपने मंत्रियों के साथ सुग्रीव रहते थे वे दो वीर राजकुमारों को देखकर भयभीत होकर हनुमान जी को बुलाकर उनसे दोनों राजकुमारों के बारे में जानने के लिए उन्हें भेजते हैं।
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हनुमान जी ब्राह्मण के भेष में दोनों राजकुमारों के समक्ष जाकर उनका परिचय तथा उनके आने का प्रयोजन पूछते हैं। उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री राम ने कहा कि मेरा नाम राम और भाई का नाम लक्ष्मण के रूप में बताते हुए कहते हैं कि मेरे साथ मेरी पत्नी थी।
राक्षसों ने उनका हरण कर लिया है। हम लोग उनके खोज करने निकले हैं। इतना सुनते ही हनुमान जी ब्राह्मण का वेश बदल कर असली रूप में आकर श्री राम के चरणों में दंडवत करते है और दोनों भाइयों को अपने कंधों पर बैठाकर आकाशमार्ग से अपने सुग्रीव के पास पहुंचते हैं।
सुग्रीव ने श्री राम लक्ष्मण को बड़े आदर सम्मान के साथ प्रभु श्री राम लक्ष्मण को आसन पर बैठाते हैं और अपने बड़े भाई बालि के द्वारा सताए जाने के सम्बंध में विस्तार से जानकारी देते है। श्री राम सुग्रीव को मदद करने का वचन देते हैं।
इसके बाद सुग्रीव व बाली में युद्ध हुए के दौरान श्री राम ने पेड की आड़ से अपने बाण से बालि को मार देते हैं। मरते वक्त बालि ने अपने पुत्र अंगद को श्री राम को सौंपकर अपने शरीर का त्याग कर देता है।
श्री राम ने बालि को मारकर किष्किंधा का राजपाट महाराज सुग्रीव को देकर सीता का पता लगाने का आदेश देते हैं। सुग्रीव ने वानरों की टोली को एकत्रित कर सीता का पता लगाने को कहते है। जामवंत के साथ अंगद, नल-नील सहित प्रमुख वानरों की समुद्र तट पर पहुंचती है।
इसी बीच जामवंत ने हनुमान को उनके बल की याद दिलाते है। इसके बाद हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंचते है। वहां पहुंचकर मां सीता को परिचय बताते हैं। इसके बाद बगीचे के फल खाते है और वृक्षों को उखाड़ते हैं।
इस दृश्य को देखकर वहां के रख वाले इसकी सूचना महाराज रावण को देते हैं। रावण मेघनाथ को भेजते हैं मेघनाथ ब्रह्मास्त्र से हनुमान को बांधकर महाराजा रावण के पास ले गया। राक्षस रावण की आज्ञा पाकर हनुमान की पूछ में आग लगा देते हैं। इसके बाद हनुमान लंका में आग लगा देते हैं।
जनपद के ग्रामीण इलाकों में रामलीला का जीवंत मंचन किया जा रहा है। इसी क्रम में बहादुरगंज, मुहम्मदाबाद व सिधागरघाट में कलाकारों ने सोमवार की शाम रामलीला का मंचन किया।



भावपूर्ण प्रस्तुति को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। बहादुरगंज में आयोजित रामलीला में लंका दहन लीला का सजीव मंचन किया गया।

बहादुरगंज : हनुमान श्री राम का संदेश लेकर सीता माता की खोज में लंका पहुंचे थे। अशोक वाटिका में सीता माता से भेंट के बाद उन्होंने लंका की शक्ति का आंकलन किया और रावण को संधि का संदेश दिया।



मुहम्मदाबाद : पंचवटी में घूमते हुए रावण की बहन शूपर्णखा रामचंद्र की कुटिया के पास पहुंची। दोनों भाईयों को देख वह मोहित हो गई। श्री रामचंद्र मुस्कराते हुए उसे लक्ष्मण के पास भेज दिए। लक्ष्मण ने उसे रामचंद्र के पास जाने की बात कहने लगे।

क्रोध में आकर लक्ष्मण ने उसका नाक काट दिया। सिधागरघाट : क्षेत्र के पाली में राम, लक्ष्मण पर्वत पर सीता की खोज में पहुंच गए। वहां हनुमान से मुलाकात होती है और वे सुग्रीव के पास ले जाते है। राम, लक्ष्मण व सुग्रीव की मित्रता होती है।
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