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पछुआ के आगे बेबस अग्निशमन विभाग

Sun, 10 Apr 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
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अाग - फोटो : अमर उजाला
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गेहूं की मंड़ाई के लिए जिस पछुआ हवा की दरकार होती है, वही गर्म हवा खलिहान के लिए आफत भी बरपा सकती है। गर्मी बढ़ने के साथ खेत, खलिहान, मंड़ई में अगलगी की घटनाएं बढ़ गई हैं। ज्यादातर जगहों पर ग्रामीण अपने प्रयास से ही आग बुझा पाते हैं और जब दमकल पहुंचती है तो केवल राख का ढेर बचा रह जाता है। अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। 70 किलोमीटर के दायरे में बसे जिले में महज पांच फायर टेंडर (दमकल) हैं। दो साल से सैदपुर और जमानिया में फायर स्टेशन प्रस्तावित है लेकिन अब तक नहीं बन पाया है।
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  बिजली के जर्जर तारों के टूटने से अक्सर खेत, खलिहानों, मड़ई  में आग लगती रहती है। इससे भारी नुकसान होता है। अगल-अलग कारणों से जनवरी  से मार्च के बीच 27 जगहों पर अगलगी की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं की सूचना देने के बाद दमकल आधे से एक घंटे देर से पहुंच पाई। तब तक बहुत नुकसान हो चुका था और ग्रामीणों ने आग पर काबू पा लिया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार आग की इन घटनाओं  में 19 लाख 38 हजार तक की क्षति हुई है।

 अग्निशमन विभाग के पास इतने कम संसाधन हैं कि वह समय रहते आग पर काबू पाने की स्थिति में है ही नहीं। शहरी इलाके में भी आग पर काबू पाने में विभाग को दिक्कत होती है तो सुदूर गांवों में क्या होता है, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। हालत यह है कि शहरी क्षेत्रों में अगलगी होने पर स्थल पर विभाग चार हजार लीटर क्षमता का फायर टेंडर तो लेकर जाता है और पानी समाप्त होने के  बाद पानी के लिए उसे संबंधित विभागों से पानी का टैंकर मंगाना पड़ता है। अग्निशमन विभाग ने सैदपुर तहसील के  2700 लीटर का एक फायर टेंडर विंध्याचल मेले में भेज दिया है। ऐसे में विभाग के पास मौजूद 2500 लीटर के दो, 2700 लीटर के एक और एक चार हजार लीटर क्षमता का फायर टेंडर मौजूद है। इसमें 2500 लीटर क्षमता वाला एक फायर टेंडर जमानिया और दूसरा मुहम्मदाबाद तहसील में रखा गया है। मुहम्मदाबाद इलाके में सर्वाधिक अगलगी की घटनाएं होती हैं।
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ऐसे में वहां एक से ज्यादा फायर टेंडर होने चाहिए और वह भी अधिक क्षमता के। इसके  2700 और  चार हजार लीटर क्षमता के फायर टेंडर से सदर तहसील के क्षेत्रों में लगी  आग की घटनाओं पर काबू पाने का काम किया जाता है। साथ ही सैदपुर तहसील पर  तैनात 2700 फायर टेंडर के विंध्याचल मेले में भेजे जाने से इस क्षेत्र में  आग लगी की घटना पर काबू पाने के लिए जिला मुख्यालय पर मौजूद फायर टेंडर को भेजने का काम किया जा रहा है। अक्सर जहां इनको भेजा जाता है, वहां पानी की  कमी पड़ जाती है। ऐसे में कुुओं और तालाबों से पानी लेने की जरूरत पड़ती है। 

इसके लिए पांच पोर्टेबल पंप भी हैं। इन पंपों को ले जाने के चार छोटी  गाड़ियां हैं। जखनिया और कासिमाबाद तहसील के क्षेत्रों में आग पर काबू पाने  के लिए दमकल की अलग से व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में वहां जिला मुख्यालय से फायर टेंडर भेजे जाते हैं। जब तक दमकल 20 से 40 किलोमीटर का सफर पूरा करके यहां पहुंचती है तब तक सब कुछ राख हो चुका होता है।
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