देवकली पंप कैनाल से निकली दलपतपुर राजवाहा किसानों के लिए बेमतलब साबित हो रही है। क्योंकि दशकों से नहर में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे क्षेत्र के किसानों को खेती के दौरान सिंचाई की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पानी के अभाव में हर वर्ष उनकी फसल मार खा जा रही है। इससे क्षेत्रीय किसानों में जबरदस्त रोष है।
क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से करीब तीन दशक पहले नहर का निर्माण कराया गया था। उस दौरान किसानों के मन में आस जगी थी कि अब उन्हें सिंचाई की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन उन्हें यह खुशी आज तक नहीं मिल सकी है। विभागीय उपेक्षा के चलते आज तक नहर सूखी ही है।
दलपतपुर राजवाहा जहूराबाद से निकलकर गडार ड्रेन के टौंस नदी में जाकर गिरता है। 20 किमी क्षेत्रफल के किसानों की सिंचाई करने के लिए बनी नहर को गोविंदपुर गांव के पास तक खोद कर छोड़ दिया गया जिससे नहर की टेल तक खुदाई नहीं हो सकी। इस नहर से धान तथा गेहूं की सिंचाई करने वाले दर्जनों गांवों के सामने पानी का संकट बना रहता है। क्षेत्र के राजापुर, बांकी, असावर, दलपतपुर, भठवा, सरेजा, कमसड़ी, खड़हरा, नेवादा, हरदासपुर, दुबिहा, गोविंदपुर, गडार आदि गांवों के किसान नहर के पानी के अभाव में महंगे डीजल तथा निजी पंपों से पानी खरीद कर खेतों की सिंचाई करने को बाध्य हैं। क्षेत्रीय किसानों ने कई बार संबंधित उच्चाधिकारियों को इससे अवगत भी कराया लेकिन आश्वासन के सिवा किसानों को कुछ भी नहीं मिला।
जनप्रतिनिधियों ने भी इस नहर के लिए कोई पहल नहीं की। दुबिहा निवासी दीनानाथ राय कहते हैं कि हम लोग की उपजाऊ जमीन नहर के नाम पर ले ली गई लेकिन पानी तो दूर नहर की खुदाई भी नहीं हो पाई। हरदासपुर के युवा किसान कमलेश यादव ने बताया की पानी के अभाव में किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर नई तकनीकी पर आधारित खेती नहीं कर पा रहे हैं। पातेपुर निवासी दिनेश कुशवाहा का कहना है कि विभाग की लापरवाही से नहर में पानी नहीं आ रहा है। अधिशासी अभियंता देवकली पंप कैनाल एसपी सिंह का कहना है कि नहरों की खुदाई एवं सफाई के लिए शासन से धन की मांग की गई है। धनराशि मिलते ही कार्य कराया जाएगा।