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महाशिवरात्रि पर विश्वेश्वरनाथ महादेव का होता है भव्य शृंगार

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मौधा। महाशिवरात्रि की तैयारियां तेज हो गई हैं। शिवालयों की सफाई और मंदिरों की रंगाई की जा रही है। औड़िहार में गंगा के किनारे स्थित विश्वेश्वरनाथ महादेव धाम में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। इस अवसर पर दो दिन का मेला भी लगता है। यह मंदिर आदित्य घाट पर स्थित वराहधाम परिसर में है।
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भगवान शिव और देवी पार्वती एक ही अरघे में दो शिवलिंगों के रूप में विराजमान हैं। गंगा स्नान के बाद रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती के इस स्वरूप की आराधना करने के लिए इलाके के श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। यहां दो दिनों तक मेला लग जाता है।
मान्यता है कि यहां कभी शृंगी ऋषि का आश्रम था। शृंगी ऋषि ने ही महाराज दशरथ के यहां पुत्रयेष्टि यज्ञ कराया था। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अवतार के बाद तो शृंगी ऋषि और उनके आश्रम का महात्म्य बढ़ गया और औड़िहार स्थित उनके आश्रम में साधु-संतों की भीड़ होने लगी। ऋषि कश्यप के पुत्र हिरण्याक्ष ब्रम्हा जी से वरदान पाने के बाद पृथ्वी को लेकर रसातल में चला गया। तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी का उद्धार किया। उसके बाद भगवान विष्णु का मन महादेव से मिलने को व्याकुल हो गया। शृंगी ऋषि के औड़िहार स्थित आश्रम में भगवान शिव व माता पार्वती ने उन्हें दर्शन दिए थे। उसके बाद शिव व माता पावर्ती के स्वरूप को दो शिवलिंग के स्वरूप में स्थापित किया गया। कहते हैं कि विश्वेश्वरनाथ महादेव जैसा शिवलिंग कोई दूसरा नहीं है। यहां वर्ष पर्यंत भगवान शिव और श्रीहरि के भक्तों का यहां तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी लालू बाबा ने बताया कि महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां दो दिवसीय मेला एवं 24 घंटे चलने वाले रामचरित मानस पाठ का आयोजन हर वर्ष किया जाता है।
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