सेवराई तहसील क्षेत्र के अमौरा गांव में मंगलवार की दोपहर चकरोड उखाड़ने को लेकर उपजे विवाद ने हंगामे का रूप ले लिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम सेवराई राजेश प्रसाद चौरसिया ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। शांति व्यवस्था बनाने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद रही।
लघु डाल विभाग द्वारा गांव के दक्षिण तरफ से नहर को मुख्य नहर से जोड़ने के लिए चकनाली (छोटी नहर) का निर्माण कराया गया था, लेकिन कागजात में चक नाली की जगह पर चकरोड स्थापित था। वर्ष 2019-20 के विकास कार्य के दौरान तत्कालीन ग्राम प्रधान ने चकरोड निर्माण करा दिया। अब सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध ना होने पर ग्रामीणों ने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की थी। सेवराई एसडीएम कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। इधर लघुडाल विभाग के जेई औरएक्सईएन भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर खड़ंजा उखाड़ने की कार्रवाई में जुट गए। सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान एवं उसके समर्थकों में हड़कंप मच गया। भारी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने वहां हंगामा करना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि उस नहर से पानी कभी नहीं जा रहा था और नक्सा, खसरा और खतौनी आदि में भी चकरोड यथा स्थिति अपनी जगह पर स्थापित है। पूर्व प्रधान परमहंस सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि विभाग जबरन ही रोड उखाड़ने की कार्रवाई कर रहा है। जबकि ग्रामीणों की मांग पर लोगों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए लाखों रुपये की लागत से खड़ंजा का निर्माण कार्य कराया गया था। इधर हंगामा की सूचना मिलते ही एसडीएम राजेश प्रसाद भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। साथ ही विभाग को यह निर्देश दिया कि सड़क के नीचे पाइप लाइन बिछाकर नहर के पानी की निकासी की जाए और ऊपर से चकरोड का निर्माण हो, जिससे लोगों के आवागमन में अवरुद्ध ना हो और किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिल सके।