गाजीपुर। 67 करोड़ की साइबर ठगी में पुलिस ने अंतरराज्यीय तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी ऋषिराज ने 2014 में चंदौली से पाॅलिटेक्निक की पढ़ाई की थी, जबकि आरोपी रोहन कुमार ने 2017 में स्नातक किया था और डीआरडीओ दिल्ली में काॅन्ट्रेक्ट के आधार पर काम कर चुका है। आरोपी सचिन सिंह बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी कर चुका है।
ये तीनों देशभर में सैकड़ोें म्यूल (फर्जी) खाते खुलवाने के बाद इसकी जानकारी टेलीग्राम पर संचालित क्राउन पे कंपनी को बेचकर ठगी करते थे। इनके पास से बड़ी संख्या में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड व मोबाइल फोन, जीएसटी नंबर और एमएसएमई के कागजात बरामद हुए हैं।
तीनों के मोबाइल फोन की जांच की गई तो पता चला कि इनके खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 75 से अधिक शिकायतों में 67 करोड़ की धोखाधड़ी का जिक्र है।
एसपी डाॅ. ईरज राजा ने बताया कि साइबर थाने में पीड़ित मनीष कुशवाहा ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले की छानबीन चल रही थी। साइबर सेल पुलिस टीम ने लंका मैदान के सामने फुल्लनपुर तिराहा से शुक्रवार की रात तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शादियाबाद थाना के छोटी जंगीपुर निवासी ऋषिराज, जमानिया कोतवाली के बरूइन निवासी रोहन कुमार और सोनभद्र जनपद के करमा थाना क्षेत्र के खैरपुर निवासी सचिन सिंह बताए।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इनके पास 700 से अधिक म्यूल खाते हैं। आरोपी सचिन सिंह ने बताया कि उसने साइबर अपराध से 2.50 करोड़ और आरोपी रोहन ने 1.75 करोड़ रुपये म्यूल खातों से प्राप्त किए हैंं। 24 से अधिक फर्जी खातों का उपयोग कर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। एसपी ने बताया कि इस संबंध में साइबर मुख्यालय लखनऊ और एमएचए 14सी को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी। इनके पास से जीएसटी नंबर व एमएसएमई संबंधी कागजात बरामद हुए हैं।
जाल में ऐसे फंसा कर करते थे फर्जीवाड़ा
एसपी डाॅ. ईरज राजा ने बताया कि आरोपी पहले किसी ऐसे व्यक्ति से दोस्ती करते थे, जिसको रुपयों की आवश्यकता होती थी। उस व्यक्ति को बहला-फुसलाकर कुछ पैसों का लालच दिया जाता था जिस व्यक्ति का खाता खुलवाना होता था, उसका आधार कार्ड व पैन कार्ड व फोटो ले लेते थे, फिर करंट अकाउंट खोलने के लिए एमएसएमई (उद्योग) प्रमाण पत्र बनवाते थे और जीएसटी नंबर रजिस्टर्ड कराने के बाद बैंक में खाता खुलवाते थे। इसके बाद साइबर अपराध (ट्रेडिंग, गेमिंग व अन्य माध्यमों) से अर्जित धनराशि मंगाते थे।
एपीके फाइल फोन में कराते थे इंस्टाॅल और प्राप्त कर लेते थे ओटीपी
एसपी डाॅ. ईरज राजा ने बताया कि गिरोह में शामिल अपराधियों द्वारा टेलीग्राम के माध्यम से क्राउन पे कंपनी को बैंक खातों की सभी जानकारी, इंटरनेट बैंकिंग का आईडी व पासवर्ड, रजिस्टर्ड मेल आईडी व मोबाइल नंबर भेज दिया जाता था। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से ही खाता धारक के मोबाइल फोन पर एपीके फाइल इंस्टाॅल करा दी जाती थी। इसके बाद खाते में लेनदेन होते ही इनको ओटीपी मिल जाते थे। टेलीग्राम पर संचालित क्राउन पे कंपनी तथा इससे जुड़े लोगों द्वारा ठगी की रकम को क्रिप्टो आदि में निवेश कर दिया जाता था।