नगर के गोराबाजार में स्थापित जिला अस्पताल कहने को तो 200 बेड का है और राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध, लेकिन अब तक यहां बर्न यूनिट तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में आग में झुलसे मरीजों का उपचार नहीं होता पाता है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में तत्काल इलाज न मिल पाने की स्थिति में उनकी मौत हो जाती है।
नगर सहित ग्रामीण इलाकों के मरीज बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल के तरफ रूख तो करते हैं, लेकिन उपचार न मिल पाने की स्थिति में उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। स्थिति तो यह है कि अस्पताल 200 बेड का है, लेकिन बर्न यूनिट नहीं है। ऐसे में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों का जहां आपात कक्ष में ही प्राथमिक उपचार कर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। वहीं हल्के- फुल्के रूप से झुलसे मरीजों को इलाज कर घर भेज दिया जाता है। रेफर करने की स्थिति में कई मरीजों की वाराणसी जाते समय ही रास्ते में मौत हो जाती है। वहीं अस्पताल प्रशासन कोविड संक्रमण का हवाला देकर वार्ड न बनने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है जो ऐसे मरीजों के लिए घात सिद्ध हो रहा है। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि जल्द ही पांच बेड का बर्न वार्ड बनाया जाएगा। साथ ही इस वार्ड में मरीजों के उपचार के लिए व्यवस्थाएं भी दुरुस्त रखी जाएंगी, जिससे उन्हें अन्यत्र जनपदों का सहारा न लेना पड़े।