बरसात और जाड़े के दिनों में जनपद में भूगर्भ जलस्तर सामान्य स्थिति में रहता है। लेकिन, प्रचंड गर्मी में जलस्तर 200 फीट तक नीचे खिसक जाता है।
मौसम के जानकारों का कहना है कि इस बार प्रचंड गर्मी पड़ने वाली है। मार्च के अंत से ही मौसम अपना तेवर दिखाने लगेगा। लेकिन, गांवों में पेयजल मुहैया कराने को लेकर पंचायतीराज विभाग की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है।
बरसात और जाड़े के दिनों में भूगर्भ जलस्तर 100 से लेकर 150 फीट तक रहता है। गर्मी में जलस्तर नीचे खिसक जाता है। इसके कारण जलस्तर 300 से 350 फीट तक पहुंच जाता है। यह समस्या प्रत्येक वर्ष की है। भूगर्भ जलस्तर नीचे जाने से गर्मी के हर सीजन में 10 हजार हैंडपंपों को रिबोर कराना पड़ता है।
पानी का स्तर नीचे जाने से हैंडपंप पानी उगलना बंद कर देते हैं। सबसे अधिक दिक्कत ग्रामीण इलाकों में होती है। इसकी वजह, हर घर जल योजना के तहत अभी तक जनपद के सभी गांवों में पानी टंकियों के जरिये पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। यह परियोजना अभी निर्माणाधीन है। जनपद के 1238 ग्राम पंचायतों में से अधिसंख्य में पेयजल के लिए एकमात्र सहारा हैंडपंप हैं।
लेकिन, गर्मी में हैंडपंपों के सूख जाने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कत होती है। वहीं पंचायती राज विभाग की ओर से समस्या से निपटने को लेकर कोई रणनीति और योजना तैयार नहीं की गई है। विभाग ग्राम प्रधानों के भरोसे बैठा हुआ है।
विभाग का कहना है कि कार्ययोजना में संबंधित गांवों के ग्राम प्रधान रिबोर होने वाले हैंडपंपों की लिस्ट देते हैं, उनका रिबोर करा दिया जाता है। यहां तक कि गांवों में टैंकर के जरिए पेयजल आपूर्ति करने की व्यवस्था भी विभाग के पास नहीं है। डीपीआरओ अंशुल मौर्या ने बताया कि रिबोर होने वाले हैंडपंपों को कार्ययोजना में शामिल करके ग्राम प्रधान देते हैं। इसके बाद हैंडपंपों को दुरुस्त कर दिया जाता है।