जिले के प्रमुख मार्गों की पटरियां लंबे समय से सरपत और झाड़ियों से ढकी हुई हैं। यह सड़क हादसे का कारण बन लोगों की जान ले रही हैं। पटरियों की सफाई और टहनियों की छंटाई नहीं की जा रही है। नौ महीने में 5 हादसों में छह लोगों की मौत हो चुकी है।
बुजुर्गा- हंसराजपुर, मंगारी- मखदूमपुर, सैदपुर- बहरियाबाद, सुहवल- ढढनी और युवराजपुर मार्ग के साथ- साथ ताड़ीघाट- बारा मुख्य मार्ग पर जगह- जगह पेड़ की टहनियां लटकी हुई हैं। इन प्रमुख मार्गों से प्रतिदिन 30 से 40 हजार लोगों का आवागमन होता है।
शहर के भुतहियाटांड से बुजुर्गा- हंसराजपुर होते हुए जखनिया जाने वाले प्रमुख मार्ग के दोनों तरफ हंसराजपुर तक सड़क के दोनों तरफ पटरियों पर सरपत ऐसे लगा हुआ है कि थोड़ी सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है।
बुजुर्गा से हंसराजपुर तक करीब पांच किमी की दूरी सबसे खतरनाक है। 6 से अधिक जगहों पर सड़क घुमावदार है, ऐसे में रात तो दूर दिन में आमने- सामने वाहनों के टकराने का डर बना रहता है।
गौसपुर बुजुर्गा गांव निवासी डॉ. एम खालिद ने बताया कि सबसे खतरनाक स्थिति तो बेसो नदी पर बने पुल से पहले हैं। मार्ग घुमावदार होने के चलते कई बार वाहन आमने- सामने टकराने से हादसा हो चुका है।
फिरोजपुर निवासी वीरेंद्र यादव ने बताया कि सरपत हादसा ही कारण नहीं अपराधियों द्वारा रात के समय छुपकर वारदात को भी अंजाम दिया जाता है। इस मार्ग से जखनिया तहसील, दुल्लपुर, सिखड़ी और आजमगढ़ के लोग आवागमन करते हैं।
करीब सात से आठ हजार वाहनों का प्रतिदिन आवागमन बना रहता है। सादात विकासखंड का मखदुमपुर से सेमरौल- दलीपरायपट्टी तक पीडब्ल्यूडी नहर मार्ग तक सड़क के दोनों किनारे नरगट, सरपत और कांटेदार झाड़ियां राहगीरों व वाहन चालकों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई हैं।
बिजरवां निवासी रविंद्र, विष्णु और शुभम ने बताया कि प्रतिदिन इस मार्ग पर तीन से चार हजार लोगों को आवागमन है, लेकिन स्थिति जस की तस है। ई-रिक्शा चालक पन्नू राम ने बताया कि झाड़ियों की वजह से छोटे वाहन निकलना मुश्किल हो जाता है।
सैदपुर से बहरियाबाद मार्ग झाड़ियों से घिरा हुआ दुर्घटनाग्रस्त मार्ग बन चुका है। मुख्य सड़क के दोनों तरफ 5 फीट से ऊंची- ऊंची झाड़ियां इस प्रकार से लगी हुई हैं। ग्रामीण संदीप यादव और शुभम यादव ने बताया कि करीब 20 किमी के इस मार्ग पर यह स्थिति बनी हुई है।
प्रतिदिन इस मार्ग से सात से आठ हजार छोटी- बड़ी वाहनाें का आवागमन बना रहता है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ताड़ीघाट- बारा मार्ग पर सुहवल से लेकर उतरौली तक करीब आठ किमी में जगह- जगह पेड़ की टहनियां लटकी हुई हैं।
रेवतीपुर निवासी रजनीश दुबे और अमित पांडेय ने बताया कि यह बिहार जाने का मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन छोटी- बड़ी मिलाकर चार से पांच हजार वाहनों का आवागमन बना रहता है, लेकिन अब तक छंटाई नहीं हो सकी है।
समय- समय पटरियों से सरपत और जंगली घासों के झुरमुटों की सफाई कराई जाती है। बरसात के मौसम के चलते कार्य रूका हुआ था। पुन: ऐसे मार्गों को चिह्नित कर पटरियों की साफ- सफाई शुरू करा दी जाएगी।
- बीएल गौतम, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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पिछले नौ महीने में यहां हुए हादसे
- बीते आठ फरवरी को सुहवल थाने से कुछ दूरी पर बाइक सवार दो युवक सड़क हादसे के बाद बाइक सहित झाड़ियों में गिर गए थे। सुबह ग्रामीण जब टहलने निकले तो उन्हें घटना जानकारी हुई थी। तबतक डारीडीह निवासी प्रेमनिधान डारीडीह की मौत हो गई थी। एक युवक की मौत हो चुकी थी।
- 19 जुलाई को डेढगावां चट्टी के समीप ताड़ीघाट- बारा नेशनल हाईवे पिकअप के धक्के से बाइक सवार लखमीपुर निवासी बब्बन यादव और रेवतीपुर निवासी शिवम यादव की मौत हो गई थी।
- बीते 22 अगस्त : सोनहड़ा से ओढ़राई नहर मार्ग पर सरपता के चलते नहीं दिखाई देने पर एक बाइक सामने से आ रहे दूसरे बाइक से बचने के चक्कर अनियंत्रित हो गया था और सड़क पर गिरकर सिखड़ी गांव निवासी सरजू चौबे की मौत हो गई थी।
- 24 सितंबर को मऊ जनपद के चिरैयाकोट निवासी सत्यम विश्वकर्मा बहन के घर सैदपुर जा रहे थे। उनकी बाइक मसूदहा के पास क्षतिग्रस्त हो गई थी। बाइक उनकी खेत में गिरी थी, जबकि वह मृत अवस्था में झाड़ियों में पड़े थे।
- 14 अक्टूबर को बहरियाबाद- चिरैयाकोट मार्ग की पटरी सरपत से पटी होने के चलते पीछे से आ रहे ट्रक ने साइकिल सवार छात्रा श्रेया चौहान को धक्का मार दिया, जिससे वह पहिये के नीचे आ गई और कुचलकर मौत हो गई।
सुहवल-ढढनी मार्ग स्थित अंधा मोड़ के पास दोनों तरफ उगी झाड़ियों के बीच से निकलते बाइक सवार। संवा- फोटो : स्वयं
सुहवल-ढढनी मार्ग स्थित अंधा मोड़ के पास दोनों तरफ उगी झाड़ियों के बीच से निकलते बाइक सवार। संवा- फोटो : स्वयं