गाजीपुर। पिछले दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर अब नदियों पर दिखाई देने लगा है। गंगा, गोमती आदि नदियों के जलस्तर में हल्का बढ़ाव हो रहा है तो अन्य नदियों में भी पानी बढ़ रहा है। इसके चलते तटवर्ती गांवों के लोगों में भय होने लगा है। जिले में गंगा समेत कुल नौ नदियां बहती हैं। सबसे अधिक तबाही गंगा और गोमती नदियों की वजह से होता है। हालांकि अभी सभी नदियां खतरे के निशान से काफी दूर हैं लेकिन तटवर्ती लोगों में एक चिंता घर करने लगी है।
जनपद से होकर गुजरने वाली गंगा में जब उफान आता है तो इसका असर इसकी सहायक नदियों पर भी पड़ता है। सहायक नदियों में गोमती, टोंस, कर्मनाशा, बेसो, मंगई, गांगी, भैसहीं, उदंती आदि शामिल हैं। लगातार बरसात के बाद इन सभी के जलस्तर में हल्की, फुल्की तेजी दिखाई दे रही है, जो नदियां करीब सूख चुकी थीं। उनमें पानी दिखाई देने लगा है। जिले में सबसे बड़े भू-भाग में गंगा गुजरती हैं। इसके तट पर करीब सात सौ से अधिक गांव है, जो बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। जिले के गंगा के खतरे की बिंदु 63.105 मीटर है जबकि सोमवार की दोपहर में गंगा का जल स्तर करीब 54.60 मीटर तक था।
मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार, गंगा के जलस्तर में हल्का बढ़ाव देखा जा रहा है। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। हर साल बारिश और बाढ़ की वजह से नुकसान होता है। सेमरा, बच्छका पुरा, सुल्तानपुर, गौसपुर आदि तटवर्ती गांवों के लोग पानी के बढ़ाव को महसूस करते हुए सतर्कता बरतने लगे हैं। हालांकि अभी खतरा काफी दूर है लेकिन लगातार बरसात ने थोड़ी मुश्किल बढ़ा दिया है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार, इन दिनों लगातार हो रही बरसात के कारण गंगा का पानी बढ़ने लगा है। इस इलाके में की गई हरी सब्जी आदि की खेती नष्ट होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि अभी बाढ़ के संकेत तो नहीं है लेकिन हर साल लोग इस समय घर में सीमित सामान रखते है तथा मिलते ही सतर्क हो गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों ने बताया कि गंगा का जलस्तर इस समय बढ़ता घटता रहता है। अभी जलस्तर काफी नीचे है। खतरे की कोई बात नहीं है।