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Ghazipur News: खेती और बागवानी में बढ़ता जा रहा है कृषि यंत्रों का महत्व

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी कानपुर के निर्देशन एवं अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईएसएआरसी) की ओर से सार्वजनिक फसल कार्यक्रम और जेटीडब्ल्यू पर जागरूकता कार्यक्रम चंवर ग्राम में आयोजित किया गया।
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इस मौके पर परिषद के निदेशक डॉ. शांतनु कुमार दूबे ने कहा कि खेती बाड़ी और बागवानी में कृषि यंत्रों का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आज खेती-किसानी के कामों से संबंधित कई प्रकार के कृषि यंत्र एवं मशीनें आ गई हैं, जिनसे कम समय और कम श्रम में अधिक कार्य लिया जा सकता है। इनसे किसानों की खेती बाड़ी और बागवानी के काम आसानी से पूरे हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी ही एक मशीन है जो गेहूं की बुवाई के लिए उपयोग में ली जाती है, जिसका नाम जीरो टिलेज सीड ड्रिल मशीन है।
जीरो टिलेज (बिना जुताई के सीधी बुआई) विधि का तात्पर्य एक बार में ही जीरो टिलेज सीड ड्रिल मशीन द्वारा फसल की बुआई करने से है। इस विधि के अंतर्गत पिछली फसल के 30 से 40 प्रतिशत अवशेष खेत में रहने पर भी बुवाई करने से बीज, सिंचाई एवं पानी कम लगता है।
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उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत बढ़ जाता है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान एवं गेहूं के उत्पादन में किसानों की लागत में 3500 से 4000 रुपये की बचत हो जाती है। कार्यक्रम में डॉ. सुधांशु सिंह, डॉ. आरके मलिक, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. बीपी सिंह, उप कृषि निदेशक अतींद्र सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह, किसान अमरजीत सिंह, डॉ. जेपी सिंह, डॉ. सुरेश कनौजिया, डॉ. आरके सिंह आदि उपस्थित थे।
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