वीर अब्दुल हमीद सेतु के पास घाट पर क्रूज द्वारा ड़ाला गया लंगर। संवाद
गंगा की लहरों पर सफर करके आलीशान गंगा विलास क्रूज एक महीने बाद जिले में पहुंचा। दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज एमवी गंगा विलास क्रूज में भारत भ्रमण के लिए स्विटजरलैंड पर्यटकों का एक जत्था आया हुआ है। जत्थे में 15 पर्यटक हैं। इसी क्रम में शहर के रजागंज के पास गंगा किनारे गंगा विलास क्रूज का ठहराव हुआ।
गाइड सबेचाची भट्टाचार्य ने बताया कि गंगा नदी के रास्ते भारत की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए विदेशी पर्यटक आए हैं। इसी क्रम में क्रूज ने हमीद सेतु के पास गंगा नदी में लंगर डाल दिया। क्रूज पर सवार 15 विदेशी सैलानियों के 28 अक्तूबी को काशी पहुंचने का कार्यक्रम है। विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी से गंगा के जलमार्ग और पर्यटन की संभावनाओं को लेकर क्षेत्र में उत्सुकता बढ़ गई है। भारत में निर्मित गंगा विलास क्रूज बीते 12 अक्तूबर को कोलकाता से रवाना हुआ था। पटना समेत गंगा नदी के रास्ते विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए यह वाराणसी पहुंचेगा। काशी में क्रूज के रामनगर स्थित मल्टी मॉडल टर्मिनल पर ठहरने की योजना है। यहां से विदेशी पर्यटक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने के साथ प्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा सारनाथ और ऐतिहासिक चुनार किले का भ्रमण भी उनके कार्यक्रम में शामिल है। गंगा विलास क्रूज की यात्रा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गंगा घाटी की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंचाना भी है। ऐसे जल पर्यटन से स्थानीय पर्यटन कारोबार, गाइड, नाविक, परिवहन, होटल और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही जनपद जैसे गंगा तटीय जिलों को भी पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। हमीद सेतु के पास क्रूज का ठहराव गंगा के जलमार्ग की अहमियत को भी रेखांकित करता है।