गाजीपुर। सरकार जल संरक्षण के लिए तमाम कवायद कर रही है। अमृत सरोवर योजना भी इसलिए शुरू की गई थी ताकि प्राकृतिक जलस्रोत संरक्षित हो सके लेकिन जिले में पोखरों, तालाबों के सुंदरीकरण का दावा हवा-हवाई है। पोखरे कूड़े-कचरे से बदहाल है। पानी काला पड़ चुका है। वहीं पोखरियों का अस्तित्व ही समाप्त होने की कगार पर है। तालाब भी जलकुंभी से पटे हैं। नगर में चार पोखरे हैं लेकिन शासन से मात्र एक पोखरे के लिए 39.52 लाख रुपये मिले जिससे अधूरा पाथ-वे ही बन सका। पैसे कहां गए कोई बताने वाला नहीं है। जानकारी के बावजूद जिम्मेदार लापरवाह बने हैं।
शहर के बीचोबीच ऐतिहासिक पहाड़खां का पोखरा लंबे समय से उदासीनता का दंश झेल रहा है। पोखरे का पानी काला हो चुका है। कूड़ा-कचरा पानी में तैर रहा है। आसपास के मकानों का गंंदा पानी पोखरे में गिरता है। आज तक प्रतिनिधियों व अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी। पोखरे की सीढि़यों पर भी कूड़ा-कचरा डंप है। इसी तरह शहर से सटे इलाके रौजा में मोहनलाल का पोखरा व फुल्लनपुर- अंधऊ मार्ग स्थित बंद्रीचंद का पोखरा भी अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है। भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बन चुके हैं। पुलिस लाइन के पास स्थित पोखरे की भी हालत खराब है। जलकुंभी व कचरा से पोखरा पटा है।
39.52 लाख रुपये में होना था पुनरुद्धार और सुंदरीकरण
पीजी कॉलेज के सामने स्थित पोखरे का पुनरुद्धार व सुंदरीकरण का कार्य 39.52 लाख रुपये से होना था। धनराशि वर्ष 2022 में अवमुक्त हुई थी। यहां बैठने का स्थान, बच्चों के लिए छोटे- छोटे नाव की व्यवस्था, लाइटिंग, फूटपाथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल थे। सुंदरीकरण के नाम पर खोदाई कराकर मिट्टी निकाली गई और एक ही तरफ पाथ-वे बन सका।पोखरा जलकुंभी से पटा है और गंदगी का अंबार है।
बादशाह अकबर के समय बना था पहाड़ खां का पोखरा
पहाड़ खां का पोखरा का इतिहास काफी पुराना है। मुगल बादशाह अकबर ने पहाड़ खां को गाजीपुर की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसका निर्माण उन्होंने ही अपने कार्यकाल में करवाया था। कभी यह पोखरा जिले की शान होता था। इसकी खूबसूरती निहारने के लिए लोग सुबह-शाम आते थे, लेकिन दिन बीतने के साथ ही आसपास के लोगों ने इसे कूड़ादान बना दिया।
रामलीला मंचन के दौरान सरयू नदी बन जाता है पहाड़ खां का पोखरा
रामलीला मंचन के दौरान पहाड़ खां का पोखरा सरयू नदी बन जाता है। इसमें भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को केवट नाव पर बैठाकर उस पार ले जाता है। तत्कालीन ईओ लाल चंद्र सरोज ने इस पोखरे के सुंदरीकरण के लिए 4.91 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन दो वर्ष बाद भी उसके सुदंरीकरण को लेकर कोई अब तक ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।