गाजीपुर/सादात/दुल्हपुर। सनातन विचारधारा के प्रचार प्रसार के केंद्र के रूप में विख्यात सिद्धपीठ हथियाराम मठ में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता वृद्धांबिका देवी (बुढ़िया माई) और सिद्धिदात्री माता का दर्शन-पूजन किया और प्रदेश के लिए मंगलकामना की। इसके बाद शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इसके बाद राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता विषयक प्रबुद्धजन संवाद संगम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 900 वर्ष प्राचीन इस सिद्धपीठ में आकर देवी मां के दर्शन पूजन का उन्हें जो सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसके लिए मठ के पीठाधिपति महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज का साधुवाद करते हैं, जिनके बुलावे पर उन्हें यहां आने का सौभाग्य मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गाजीपुर जनपद समृद्ध परंपरा का उद्गम स्थल है। धरती माता की प्रकृति से भी यहां की एक पहचान है। उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रत्येक देश की अलग-अलग पहचान है, लेकिन भारत की अपनी धार्मिक पहचान है। त्रेता युग से आध्यात्मिक रूप में भारत जाना जाता है। उन्होंने मठ के पीठाधिपति एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज द्वारा लोक मंगल की कामना के साथ किए जाने वाले धार्मिक और अन्य कार्यों की सराहना किया।
आध्यात्मिक चेतना से विकसित होगा भारत-सीएम ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना को ध्यान में रखकर जो काम करेगा उसका परिणाम भारत को विकसित करने में सार्थक होगा, बस धैर्य रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज से सात से आठ वर्ष पहले लोगों के लिए यह सपना था और विरोधियों के लिए बोलने का मौका था। पूरा देश सनातन एकजुट होगा संकल्प लिया, जिसका परिणाम सामने है कि रामलला अपनी जन्मभूमि में विराजमान है।
स्वार्थ के लिए महापुरुषों पर टिप्पणी करना गलत-सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के लिए बलिदान देने वाले जटायु हों या फिर निषादराज, इनके नाम पर भी आज अयोध्या में पहचान के लिए एक स्थल बना है। कहा कि भगवान राम के पैदा होने से पहले ही ऋषि मतंग ने माता शबरी को उनके आने की भविष्यवाणी कर दी थी। यही भारत की संत परंपरा है। उन्होंने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए महापुरुषों पर टिप्पणी करना सरासर गलत है।
शहीदों के परिजनों को किया सम्मानित-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1:22 बजे से सम्मान समारोह की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के बड़े पुत्र जैनुल हमीद, महावीर चक्र विजेता शहीद राम उग्रह पांडेय की पुत्री सुनीता पाण्डेय सहित अन्य एक शहीद के परिजन को मुख्यमंत्री ने शॉल, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।
सीएम भारत के भविष्य-पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के रूप में जाना जाता है, जहां पर 33 करोड़ देवता रहते हैं। उस मिट्टी से निकले योगी आदित्यनाथ को राष्ट्र भारत के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है।
हथियाराम मठ में इन्होंने लगाईं है हाजिरीमोहन भागवत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत भी मठ का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने यहां दर्शन-पूजन किया और वृक्षारोपण भी किया था।
-अफजाल अंसारी: गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी ने भी मठ का दौरा किया और पीठाधीश्वर का आशीर्वाद लिया था।
-बृजभूषण शरण सिंह: पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मई 2025 में हथियाराम मठ का दौरा किया था।
सिद्धपीठ हथियाराम मठ की विशेषताएं:
-अखंड ज्योति और साधना: यह एक प्राचीन सिद्धपीठ है, जहां आदि गुरु द्वारा स्थापित बुढ़िया माई की अखंड ज्योति 900 से अधिक वर्षों से जल रही है।
-शिष्यों का विशाल समुदाय: इस मठ की शाखाएं देश भर में फैली हुई हैं, और इसके लाखों शिष्य हैं।
-धार्मिक अनुष्ठान: मठ में नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजन और यज्ञ जैसे आयोजन किए जाते हैं।
-धार्मिक धरोहर: यह मठ कई ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को सहेजे हुए है, जिनमें से एक मां गंगा द्वारा प्रदान किया गया कटोरा भी है।
गंगा आरती की शुरुआत : 26वें पीठाधीश्वर स्वामी भवानीनंदन यति ने काशी के दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की स्थापना करके गंगा आरती की शुरुआत कराई।
शिक्षा का प्रसार : मठ ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पीठाधीश्वर के कार्यकाल में पूर्वांचल के कई जिलों में सैकड़ों विद्यालयों की आधारशिला रखी गई।
-सामाजिक समरसता: मठ सामाजिक सद्भाव और धार्मिकता के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय रहा है।
महिलाओं के लिए सुविधाएं : मठ ने छठ पूजा जैसे पर्वों पर व्रती महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
आध्यात्मिक और संस्कारवान जीवन का संदेश : यह मठ धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देता है, जिससे लोगों में संस्कार और धैर्य विकसित होते हैं।
हथियाराम मठ की परंपरा करीब 700 साल पुरानी है, और इसे देश के प्रसिद्ध सिद्धपीठों में गिना जाता है।
पांच महामंडलेश्वर : हथियाराम मठ से अब तक पांच महामंडलेश्वर बने है। इनमें महामंडलेश्वर बालकृष्ण यदि महाराज, वर्तमान पीठाधीश्वर संत भवानीनंदन यति महाराज, परेशानंद यति महाराज, आत्मप्रकाश यति महाराज और सोमेश्वर यति महाराज का नाम शामिल है।