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Ghazipur News: मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुई चेहरे की दुर्लभ बीमारी की सफल सर्जरी

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गाजीपुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चेहरे की दुर्लभ बीमारी हेमिमैंडिबुलर हाइपरप्लासिया की पहली सफल सर्जरी हुई है। ये बीमारी 86 हजार लोगों में किसी एक व्यक्ति को होती है। इमसें चेहरे के एक तरफ हिस्सा जैसे जबड़ा टेढ़ा होने लगता है। खासकर युवतियों में इस बीमारी का अधिक प्रभाव पाया जाता है। इस जटिल व दुर्लभ बीमारी का ऑपरेशन डेंटल विभाग के मैक्सिलोफेशियल सर्जन और उनकी टीम ने कुशलता पूर्व संपन्न किया। चेहरे की सौंदर्यता बनी रही, इसके लिए सर्जरी से पहले सीटी स्कैन का प्रयोग करके थ्री डी सर्जिकल साॅफ्टवेयर योजना तैयार कर सर्जिकल बोन कटिंग गाइड बनाई गई।
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जनपद की एक 24 वर्षीय युवती का दो वर्ष से चेहरे का एक तरफ हिस्सा टेढ़ा होता जा रहा था। परिजन गैर जनपदों एवं अन्य प्रांतों के निजी अस्पतालों में युवती को ले गए, लेकिन अधिक खर्च के चलते उन्हें कदम पीछे करना पड़ा। इसके बाद परिजन युवती को मेडिकल कॉलेज के डेंटल ओपीडी में लेकर आए। जांच के बाद चिकित्सकों ने पाया कि मरीज के चेहरे के बांई तरफ का हिस्सा टेढ़ा हो गया है, ये हेमिमैंडिबुलर हाइपरप्लासिया जैसी दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। सर्जरी करने के लिए डेंटल विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर मैक्सिलोफेशियल सर्जन डा. यू विगनेश ने भर्ती करने के बाद मरीज का सीटी स्कैन कराया। इसके बाद थ्री डी सर्जिकल सॉफ्टवेयर के जरिए कंप्यूटर में ही बोन कटिंग की गाइड तैयार की गई, जिससे ऑपरेशन के बाद मरीज का चेहरा कैसा दिखाई पड़ेगा। ये तैयारी करने में सर्जरी टीम को चार से पांच दिन लग गए। इसके बाद मरीज की सर्जरी की गई। सर्जरी टीम में डेंटल विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर मैक्सिलोफेशियल सर्जन डा. यू विगनेश, डाॅ. रीडिंग वेल, डाॅ. दिव्या, डाॅ. रागिनी, एनेस्थीसिया टीम में डाॅ. विनीत मिश्रा और डाॅ. रवि शामिल थे।
चेहरे की दुर्लभ बीमारी हेमिमैंडिबुलर हाइपरप्लासिया का सफल सर्जरी मेडिकल काॅलेज के डेंटर विभाग के मैक्सिलोफेशियल सर्जन और उनकी टीम ने की है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में यह पहली सर्जरी है। अस्पताल में जटिल से जटिल और सामान्य बीमारियों की लगातार सर्जरी हो रही है।- प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज गाजीपुर।
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निजी अस्पताल में सर्जरी पर दो लाख हो जाता खर्च
डेंटल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर मैक्सिलोफेशियल सर्जन डा. यू विगनेश ने बताया कि यह एक दुर्लभ बीमारी है। इससे चेहरे में विषमता आने लगती है। अधिकांश यह बीमारी हार्मोनल प्रभाव, संक्रमण, आनुवंशिकता, हाइपरवास्कुलरिटी और आघात से होती है। निजी अस्पतालों में इसकी सर्जरी कराने पर करीब दो लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है।
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