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Ghazipur News: कहीं टैंक तो कहीं सिलिंडर तक नहीं, कैसे बुझेगी आग

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गाजीपुर। ईश्वर न करें लेकिन लखनऊ जैसी आग की घटनाएं यहां सरकारी अस्पतालों में हुईं तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। कहीं टैंक और पाइप लाइन तो कहीं सिलिंडर तक नहीं हैं। चार वर्ष बाद भी 200 बेड के पुरुष अस्पताल को आज तक फायर ब्रिगेड की एनओसी नहीं मिल सकी है। जबकि नवनिर्मित 300 बेड और 100 बेड के महिला अस्पताल में आग से बचाव के प्रबंध का दावा किया जा रहा है।
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शहर के गोराबाजार स्थित 200 बेड का पुरुष अस्पताल चार वर्ष पूर्व महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया था। यहां आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई थी और हाइड्रेंट लगाए गए थे लेकिन पानी का टैंक नहीं बन सका था। फायर ब्रिगेड की टीम ने एनओसी देने से मना कर दिया। प्रत्येक वार्ड और कक्ष में सिलिंडर रखा गया था।
ऐसे में अब कॉलेज प्रशासन का दावा है कि टैंक छत पर बनाकर पाइप लाइन से जोड़ दिया गया है। अभी एक-दो कमियां हैं, जिन्हें दूर करने के बाद एनओसी मिलेगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात की जाए तो जमानिया तहसील के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बरुईन गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अग्निशमन व्यवस्था का अभाव बना हुआ है।
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दोनों केंद्रों पर न तो अग्निशमन यंत्र ठीक से लगाए गए हैं, ना ही आपातकालीन स्थिति में बचाव की समुचित व्यवस्था है। बरुईन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तो फायर एक्स्टींग्यूशर है ही नहीं। जबकि नगर स्थित पीएचसी पर अग्निशमन यंत्र होने के बावजूद उसे दीवार पर नहीं लगाया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. गुलाब शंकर ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर अग्निशमन यंत्र मौजूद है लेकिन उसे अब तक दीवार पर टांगा नहीं गया है।
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