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Ghazipur News: कोई आयरलैंड तो कोई गुरुग्राम से छठ व्रत करने पहुंचा गांव

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डाला छठ की खबर में व्रती--आयरलैंड की ऐशमी पांडेय। स्रोत- स्वयं
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गाजीपुर। लोकआस्था का महापर्व डाला छठ जिले में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह महापर्व जहां नई पीढ़ी के लिए आस्था का नया अनुभव है, वहीं बुजुर्गों के लिए यह वर्षों पुरानी परंपरा और विश्वास का प्रतीक भी है। कोई विदेश से छठ मनाने के लिए मातृभूमि पर आया है तो बड़े ओहदे का रसूख परे कर व्रती बना है। आस्था का यह ज्वार जिले के गांव-गांव व घर में फैला है। कहीं-कहीं परिवार के सभी सदस्य व्रती हैं।
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छुट्टी लेकर इंजीनियर आईं घर-सैदपुर। नगर पंचायत के वार्ड नंबर 7 अंतर्गत मालवीय नगर की निवासी मोनिका हरियाणा के गुरुग्राम में विप्रो में इंजीनियर है। वह डाला छठ व्रत रखती हैं और व्रत के लिए छुट्टी लेकर गांव आईं हैं। वह कहती है कि आस्था के इस पर्व पर प्रकृति पर प्रदूषण के बचाव जैसे वैज्ञानिक विविधताओं से भरे होने के कारण वह इसके महत्व को आत्मसात करती हैं।
विदेश में रहती लेकिन गुनगुनाती हैं भोजपुरी-सैदपुर। नपं के वार्ड नंबर चार अंतर्गत स्टेशन रोड निवासी ऐश्मी पांडेय डाला छठ मनाने के लिए पहली बार आयरलैंड से अपनी जन्मभूमि पर आई हैं। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी आयरलैंड से यहां आए हैं। ऐश्मी आयरलैंड की सीएनएच ग्लोबल कंपनी में इंजीनियर हैं। इसके बावजूद वह भोजपुरी में छठ का गीत राग से गाती हैं। ऐश्मी का कहना है कि डाला छठ लोक जीवन को मजबूत बनाने का पर्व है। आस्था के बिना जीवन अधूरा है। इस पर्व पर आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों निखर उठता है और व्रती महिला जलधार में सूर्य को अर्घ्य देकर निहाल हो जाती है।
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पहली बार पूरा परिवार करेगा व्रत-जमानिया। रेवतीपुर गांव में कमला प्रसाद उपाध्याय का एक ऐसा परिवार है, जहां महिला और पुरुष दोनों इस व्रत को रखते है। उनके पुत्र विशाल विपिन और विवेक कुमार उपाध्याय अपनी पत्नी प्रतिमा विजिया और स्मिता उपाध्याय के साथ संतान की सुख समृद्धि के लिए व्रत व्रत कर रहे हैं। इसके अलावा परिवार के पुरुष और महिलाएं यानी पूरा परिवार ही छठ का व्रत कर रहा हैं। कमला उपाध्याय के तीनों पुत्र फौज में है। विशाल की तैनाती गुजरात में है। विपिन यूपी के मेरठ और विवेक कुमार उपाध्याय जम्मू के अखनूर में तैनात है। सभी छुट्टी लेकर इस पर्व को मनाने के लिए परिवार के साथ गांव आए है। संवाद
याद नहीं कि यह व्रत कब शुरू किया था। बचपन से ही मां को छठ करते देखती थी। अब ये व्रत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। छठ व्रत केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि यह परिवार और समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाला पर्व है।-आशा उपाध्याय (71 वर्ष), रेवतीपुर।
पहली बार छठ व्रत कर रही हूं। बचपन से इस व्रत को करते देखना और अब स्वयं इसका हिस्सा बनना गर्व और भक्ति का अनुभव है।-स्मिता उपाध्याय, रेवतीपुर
पहली बार अपने पुत्र के दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रख रही हूं। मां सविता तिवारी और अन्य महिलाओं को यह कठोर व्रत करते देखा है। इससे प्रेरित होकर इसे करने का संकल्प लिया।-टिंकल पांडेय गाजीपुर।
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