नहाए खाए का विधान करतीं व्रती महिलाएं। संवाद
गाजीपुर/गहमर। भगवान भास्कर की आराधना का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शनिवार को नहाय-खाय से शुरू हो गया। व्रतियों का रविवार को खरना पूजन के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। सोमवार की शाम अस्ताचलगामी और मंगलवार की सुबह उगते हुए सूर्य को व्रती महिलाएं अर्घ्य देंगी। जिले में लोक आस्था का महापर्व छठ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। शहर के कलक्टर, नवापुरा, ददरी, सिकंदरपुर समेत 34 घाटों पर छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा गहमर, बारा के गंगा घाटों पर तैयारी अंतिम चरण में है।
गहमर, करहिया, बारा, सायर, देवल, रहना, बरेंजी, हथौरी, पचौरी आदि जगहों पर छठ व्रती भगवान सूर्य की उपासना में लीन हैं। छठ व्रती गंगा और तालाबों से जल ले जाकर मिट्टी के बने चूल्हे पर शुद्ध वातावरण में प्रसाद तैयार किया गया। प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए है। कामाख्या धाम मंदिर के महंथ आकाश राज तिवारी ने बताया कि भगवान सूर्य आरोग्यता के देवता है। इसलिए व्रत करने से दैहिक, दैविक, भौतिक सामाजिक, सांस्कृतिक सभी तरह के निरोग्यता प्राप्त होती है। साथ ही सूर्य की पूजा-अर्चना से आध्यात्मिक उर्जा प्राप्त होती है। व्यक्ति निरोग एवं धनवान रहता है तथा समाज में सुख- समृद्धि आती है।