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Ghazipur News: अपार आईडी का कार्य पूरा होने तक सभी बीईओ का रोका वेतन

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जिले के विद्यालयों में अपार आईडी बनाने का कार्य जोर नहीं पकड़ पा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 42 प्रतिशत यानी 2 लाख 93 हजार से अधिक छात्रों की आईडी जेनरेट हो सकी है। सबसे खराब स्थिति जखनिया और कासिमाबाद ब्लॉक की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसको गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं संबंधित विद्यालयों के सभी शिक्षकों का अपार आईडी का कार्य शत-प्रतिशत पूरा होने तक फरवरी माह का वेतन रोक दिया है।
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जिले के 16 ब्लॉक एवं एक नगर क्षेत्र में बेसिक, सीबीएसई, यूपी बोर्ड, मदरसा बोर्ड, सीआईसीएसई और संस्कृत बोर्ड के 5418 स्कूल हैं। इसमें वर्तमान में 702536 विद्यार्थी नर्सरी से लेकर इंटरमीडिएट तक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन छात्रों का आटोमैटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। तमाम प्रयास करने के बावजूद जिले में 7 लाख 2 हजार 536 विद्यार्थियों के सापेक्ष 2 लाख 93 हजार 105 की ही अपार आईडी जेनरेट हो पाई है। यह कुल छात्रों का 42 प्रतिशत है। अपार आईडी का कार्य 5 फरवरी तक 90 फीसदी पूरा करना था लेकिन समयावधि बीत जाने के बाद भी इसकी गति बेहद धीमी है। शिक्षा विभाग की मानें तो छात्रों की अपार आईडी बनाने में बेसिक एवं माध्यमिक के असहायता प्राप्त विद्यालय रुचि नहीं ले रहे हैं। यही नहीं अभिभावकों की ओर से भी सहयोग नहीं मिल पाने को कारण बताया है।
अपार आईडी जेनरेट करने के काम में जखनिया और कासिमाबाद ब्लॉक की स्थिति सबसे दयनीय है। इन दोनों ब्लॉक में 35 प्रतिशत, मनिहारी 36, विरनो 37, नगर क्षेत्र 39, मरदह और जमानिया 40-40, बाराचवर और सदर में 41-41, मुहम्मदाबाद 42, भदौरा एवं देवकली 45-45, सादात 46 और भांवरकोल-रेवतीपुर में 47-47 प्रतिशत आईडी जेनरेट हुई है। इसके अलावा सैदपुर 49 और करंडा ब्लॉक क्षेत्र में 50 प्रतिशत छात्रों की ही आईडी अब तक जेनरेट हो सकी है।
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अपार आईडी का उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना है। शासन की ओर से बेसिक स्कूलों में इस आईडी को फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लागू किया गया है। आईडी में छात्रों का नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, पूरा पता, आधार नंबर, स्कूल का नाम, यू-डायस कोड, कक्षा, गांव का नाम, तहसील, एसआर नंबर सहित अन्य सभी जानकारी होगी। यह एक यूनिक आईडी नंबर होगा, जिससे छात्र का पूरा डाटा पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा।
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