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Ghazipur News: नाट्य कलाओं और रंगमंच के प्रति डाॅ. शिवमूरत के समर्पण को याद किया

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गाजीपुर। प्रसिद्ध रंगमंच कर्मी-नाटककार डॉ. शिवमूरत सिंह की प्रथम पुण्यतिथि पर उनके कृतित्व मूल्यांकन पर आधारित स्मृति ग्रन्थ ‘रंगधर्मिता के प्रतिमान : शिवमूरत सिंह’ का लोकार्पण समारोह शहर के महुआबाग स्थित एक मैरेज हाल में शुक्रवार को आयोजित हुआ।
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इस अवसर पर माध्यम नाट्य संस्थान की ओर से आयोजित वैचारिक गोष्ठी में मुख्य अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. उदयप्रताप सिंह ने डॉ. शिवमूरत सिंह के नाट्य कलाओं और रंगमंच के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
विशिष्ट अतिथि डीसीएसके के प्राचार्य प्रो. सर्वेश पांडेय ने उनको महान नाटककार के साथ एक कुशल नाट्य लेखक बताया। कहा कि उन्होंने विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से नाट्य संस्कृति को नया आधार दिया। उनके निर्देशन में अंधेरी रोशनी को 1988 में शीतला प्रसाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने केवल मंच पर नहीं बल्कि लेखन और संपादन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
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पूर्व प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि डॉ. शिवमूरत सिंह ने सीमित संसाधनों में बड़े नाटकों का मंचन कर एक उदाहरण पेश किया, जो बेमिसाल है। रंगमंच के क्षेत्र में किए गए योगदान को लेकर वह हमेशा याद रखे जाएंगे।
इस अवसर पर डॉ. शिवमूरत सिंह के नाटक में सहयोगी और कलाकारों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया, जिसमें जयसूर्य भट्ट, फरोग आलम, धर्मेंद्र जायसवाल, तौसीफ अख्तर, अपर्णा सिन्हा और शशिकांत खरवार शामिल थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार सिंह और संचालन डॉ. व्यासमुनि राय ने किया। अंत में डॉ. शिवमूरत सिंह सिंह के पुत्र कमलेश सिंह लाला ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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