शहीदाने कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके रफीकों व जानेसारों की शहादत के
सिलसिले में शहर सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों में नम आंखों से चेहल्लुम
रविवार को मनाया गया। अजादाराने हुसैन ने फर्शे अजा बिछाई। मजलिसों-मातम के
साथ ही जंजीरों से भी मातम किया गया। जुलूस के दौरान विभिन्न अंजुमनों ने
नौैहाख्वानी एवं सीनाजनी की। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
अंजुमन
गुल्जारे मुहम्मदी (रजि.) की निगरानी में जुलूस निकाला। नई सब्जी मंडी,
एमएच इंटर कालेज, रजदेपुर, टेढ़वा, रौजा, टैक्सी स्टैंड होते हुए जुलूस
विशेश्वरगंज स्थित इमाम बाड़े में पहुंचा। इस मौके पर जावेद हुसैन ने
मसायदे शोहदाएं कर्बला बयान करते हुए कहा कि इमाम और उनके कुनबे को तीन
दिनों तक प्यासा रखकर शहीद कर दिया गया। इमाम को धोखे से बुलाया गया और
यजीद ने जुल्मों-सितम ढाकर इमाम से बैय्यत कराना चाहा। इमाम ने अपने साथ ही
कुनबे की कुर्बानी कबूल की, लेकिन यजीद की बैय्यत कुबूल नहीं की।
बहरियाबाद
संवाददाता के अनुसार शनिवार की रात कसबा के उत्तर मुहल्ला में शमीमूल वरा
के सहन में अंजुमन मुंतजरीने मेंहदी, अंजुमन इमानिया, अंजुम इस्लामिया
कुदुरशीपुर, अंजुमन बेलालिया बुजुर्गा, अंजुम शहिदिया मऊपारा के लोगों ने
देर रात कर नौहाख्वानी एवं सीनाजनी की। इस दौरान चौक पर ताजिया रखा गया।
नेजामत हाफिज अश्फाक ने किया। रविवार को सुबह 10 बजे दक्षिण मुहल्ले से
जुलूस उत्तर मुहल्ला एवं बाजार होते हुए सायंकाल कर्बला पहुंचकर दफन किया
गया।
सैय्यद खुर्शीद अनवर के सहन में लखनऊ से मौलाना मुतंजीर मेंहदी ने
खेताब फराते हुए कहा कि हजरत आदम से लेकर हजरत मोहम्मद स. तक के पैगंबरों
के किए गए मेहनतों और काविसों को इमाम हुसैन ने कुनबे के साथ अपनी कुर्बानी
देकर बचाने का काम किया है। बाजार स्थित आफताब आलम सहन में मजमे के खेताब
फरमाते हुए जाफर इमान आब्दी ने कहा कि दुनिया का कोई ऐसा कोना नहीं, जहां
इमाम के चाहने वाले न हो। इस मौके पर मिषम अब्बास, शमीमुल वरा, मुतरीज
इमाम, बादशाह, ऐनुल वरा, सलीम अंसारी, फैजुल वरा, शमशाद अहमद, मो. शाहिद,
सुजाअत अली, फायक हसन, हैदर अब्बास आदि थे। थानाध्यक्ष धर्मवीर सिंह पुलिस
कर्मियों के मौजूद रहे।