फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: अफीम फैक्ट्री से गाजीपुर के अंतर्राष्ट्रीय संबंध हुए मजबूत, सामाजिक प्रभाव पर भी पड़ा प्रभाव; जानें खास

Wed, 23 Apr 2025 11:56 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

यूपी के गाजीपुर में काफी लंबे समय से अफीम फैक्टरी का काम चल रहा था। यह काम विश्वविख्यात भी हुआ था। इससे स्थानीय लोगों के लिए आए का एक साधन भी उपलब्ध हो गया था।
विज्ञापन
अफीम की फसल। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जनपद में स्थापित देश की सबसे पुरानी अफीम फैक्टरी के चलते गाजीपुर का अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत हुआ। यहां से अफीम के कच्चे माल से निकलने वाले और दवाओं में प्रयोग होने वाले मार्फिन, कोडीन फॉस्फेट, थीवेन, नास्कोपीन, आईएमओ पाउडर देश की नामचीन कंपनियों के अलावा फ्रांस, श्रीलंका और स्विट्जरलैंड तक भेजा जाता है।

विज्ञापन


25 साल पुरानी मशीनों के होने के बाद भी यहां क्षमता से 21 हजार किलो अधिक चार्ज (दवाओं में प्रयोग होने वाले माल की पहली प्रक्रिया में निकलने वाला सामान) हो रहा है।

देश में इस समय दो ही अफीम फैक्टरियां हैं। इनमें एक मध्य प्रदेश के नीमच और दूसरी गाजीपुर में है। 45 एकड़ रकबे में गाजीपुर फैक्टरी परिसर की स्थापना 1820 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी। हालांकि कंपनी के पास 215 एकड़ भूमि है।
विज्ञापन


कंपनी से जुड़े लोगों के मुताबिक ब्रिटिश कॉल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने देश में दो एजेंसी बनाई, जिनमें एक पटना एजेंसी तो दूसरी गाजीपुर में बनारस एजेंसी के नाम से थी। ब्रिटिश सरकार यहां के किसानों से अफीम की खेती करवाते थे, जिससे वे सस्ते दाम पर कच्चा माल उपलब्ध कराते थे और फैक्टरी में इसे प्रॉसेस करके बेचते थे।

विज्ञापन

इससे उन्हें भारी लाभ मिलता था। यहां आईसीएस (अब आईएएस) रैंक के अधिकारियों की तैनाती होती थी, जो ओपियन एजेंट (अब जनरल मैनेजर) कहे जाते थे। वह उस समय देश की राजधानी कलकत्ता में बैठने वाले वाइस रैक (जनरल गवर्नर) हेड को सीधे रिपोर्ट करते। 

हालांकि चीन ने अत्यधिक अफीम स्टोर होने और वहां के लोगों को लत लगने के कारण लेने से इंकार कर दिए थे, जो जिले से जलमार्ग से कलकत्ता और वहां से चीन एक्सपोर्ट किया जाता था।

बताते हैं कि ब्रिटिश साम्राज्य के 1839 में अफीम व्यापार भी चीन में प्रथम अफीम युद्धों को जन्म दिया था। हालांकि गाजीपुर और आसपास के के जिलों में अफीम की खेती धीरे-धीरे कम होती गई। 1911 में पटना का कारखाना बंद हो गया, लेकिन गाजीपुर की अफीम फैक्ट्री चलती रही। हालांकि यहां कच्चा माल सीधे लिया जाना बंद हो गया। 

इस समय राजस्थान के चित्तौड़ और बाराबंकी यूनिट से ओपियम गम गाजीपुर मंगाया जा रहा है। मौजूदा समय में फैक्टरी की क्षमता 60 हजार किलोग्राम चार्ज की है लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में 81 किग्रा चार्ज किया, जो दवाओं में उपयोग किए जाते हैं। कंपनियां च्यवनप्राश, कफ सीरप से लेकर कैंसर के मरीजों को दी जाने वाली दवाएं बनाने तक में इसका उपयोग करती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें