16 अक्तूबर की रात साढ़े सात बजे रामलीला का अनोखा मंचन होगा। इस दौरान राम, लक्ष्मण और सीता नाव से सुरसुरी (पोखरा) को पार के उत्तरी तरफ जाएंगे। इसके बाद फिर रथ विराजमान होकर भारद्वाज मुनि के आश्रम सकलेनाबाद में रुकेंगे। अगली रात भरत मनावन के दृश्य का मंचन होगा। इस दौरान अयोध्या रूपी हरिशंकरी से रथ द्वारा भरत, राम को मनाने के लिए भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचेंगे। जहां से खड़ाऊ लेकर वापस हरिशंकरी आएंगे। वहीं, अगली रात राम, लक्ष्मण और सीता रथ से अर्बन बैंक स्थित शंभुनाथ बाग के पास दो दिन का मंचन करेंगे। इसमें माता अनुसुईया संवाद, आत्रि ऋषि मिलन, विराज वध मंचन शामिल होगा। इसी तरह अगले दिन की लीला होगी, फिर उसी रात में मंचन करते हुए कलाकार लंका मैदान पहुंचेंगे। इसके बाद विजयादशमी तक यही मंचन होगा।
24 अक्तूबर की रात साढ़े सात से आठ बजे लंका के मैदान राम रावण युद्ध का मंचन होगा। रावण वध होते ही अतिथियों द्वारा मंच से रिपोट से रावण के 60 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा, जिसका इस बार लाइव प्रसारण किया जाएगा। इसके लिए मैदान और उसके बाहर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। यहां रामलीला के दौरान आधे घंटे आतिशबाजी का लोगों को अद्भुत नजारा भी देखने को मिलेगा। रात में ही राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान रथ से सकलेनाबाद आएंगे और विश्राम करेंगे।
25 अक्तूबर की रात एक बजे ऐतिहासिक भरत मिलाप का मंचन होगा। अगले दिन में 11 बजे अयोध्या वापसी के दृश्य का चलित मंचन होगा। 27 को कलेक्टर घाट पर मा गंगा के पूजन का दृश्य दिखाया जाएगा। इस मौके पर दशाअवतार की झांकी भी मंचन होगा। 28 अक्तूबर को राम राज्याभिषेक का पूरे वैदिक रीति रिवाज से मंचन किया जाएगा, जो पूरी रात चलेगी और इसी के साथ इस वर्ष के रामलीला के मंचन का समापन होगा।