मानस परिषद देवकली के तत्वावधान में शुक्रवार को 42वां मानस सम्मेलन ब्रह्मस्थल परिसर देवकली में आयोजित किया गया। प्रथम दिन प्रवचन करते हुए अयोध्या से आए हुए संत रमाशंकर प्रसाद त्यागीजी महाराज ने कहा रामचरित मानस एक आदर्श ग्रंथ है। इसका अनुशीलन आवश्यक है। इसके प्रत्येक पात्र आदर्श से परिपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि इसके उपदेशों पर चलकर संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। इस ग्रंथ में संपूर्ण मानव समाज को एक दूसरे के प्रति क्या व्यवहार एवं आचरण करना चाहिए इसकी सीख मिलती है। त्यागीजी ने कहा कि परम पिता परमेश्वर की कृपा से देव दुर्लभ मानव तन कर्म योनि में मिला है। भौतिक सुखों के उपभोग के साथ आध्यात्मिक उत्कर्ष प्राप्त कर जीव आवागमन के बंधन से मुक्त हो सकता है जो इस मानव शरीर पाने का परम लक्ष्य है।
सुख, शांति, परमानंद प्राप्त करने के लिए रामकथा एवं सत्संग भक्ति ही एक माध्यम है। रामसुधार पांडेय ने कहा जब कई जन्मों का पुण्य उदय होता है तो परमात्मा जीव को इस धराधाम पर मानव रुप में भेजता है लेकिन इस धरा-धाम पर आते ही अपने अस्तित्व को भूलकर माया में फंसकर कई प्रकार के दु:ख सहन करता है। गर्भ में किए गए वायदे को भूल जाता है। प्रवचन के कार्यक्रम में रामचंदाचार्यजी महाराज, रविंद्रनाथ त्रिपाठी, राहुलजी, शिवजी उपाध्याय आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता प्रभुनाथ पांडेय एवं संचालन अरविंद लाल श्रीवास्तव ने किया।