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बाढ़ से घिरे हैं दर्जनभर गांव

Fri, 02 Sep 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
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देवकली का प्राथमिक विद्यालय धनईपुर अभी भी बाढ़ की चपेट में है।
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गंगा के जलस्तर कम होने से अधिकांश बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत मिल गई है। जबकि मुहम्मदाबाद तहसील के करईल क्षेत्र में करीब दर्जनभर से अधिक गांव अब भी बाढ़ के पानी से डूबे हुए हैं, जिससे बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बरकरार हैं। लोग नाव के सहारे आवागमन करने को विवश हैं। बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि अभी तक उन्हें शासन की तरफ से सहायता के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे उन्हें परेशानी के बीच निराशा हाथ लग रही है।
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करीब पंद्रह दिन पहले आई बाढ़ से इलाके के 30 से अधिक गांवों में पानी घुस गया था। जिससे लोगों को अपना घर छोड़कर इधर-उधर रहने के लिए विवश होना पड़ा। बहुतों को राहत शिविरों में रहना पड़ा था। कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस जाने से लोगों का जीवन बेपटरी हो गया है। बाद में जैसे-जैसे जलस्तर में कमी होती गई। बाढ़ का पानी तो घिसकने लगा।

लेकिन रेवतीपुर, जमानिया, मुहम्मदाबाद, बारा, गहमर सहित अन्य गांव से बाढ़ का पानी पूरी तरह से निकल गया है और लोगों ने घरों की साफ-सफाई करने के बाद उसमें रहना शुरू कर दिया है। भांवरकोल क्षेत्र के कई गांवों के लोग अभी भी बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। क्षेत्र के सियाड़ी, सुरनी, नसीराबाद, आलमपुर, लालापुर, वीरभानपुर, मसौनी, सोनवानी, महेंद, सरदरपुर, शाहपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। जिनका पक्का मकान है, वह तो किसी तरह से मकान में रह रहे हैं। लेकिन गरीब जो झोपड़ियों में गुजर-बशर कर रहे थे, पानी से झोपड़ी से तबाह हो जाने तथा घिर जाने से वह प्राइमरी स्कूलों में शरण लिए हुए हैं।
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  पक्का मकानों में रहने वाले लोग नाव से किसी तरह से आवागमन कर रहे हैं। इस संबंध में सियाड़ी गांव के ग्राम प्रधान कमलेश राय ने बताया कि अभी तक इन बाढ़ से प्रभावित लोगों को शासन की तरफ से नाव के अलावा किसी भी प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे खासकर बाढ़ की वजह से अस्थायी तौर पर गुजारा करना पड़ रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत मवेशियों का पेट  भरने को लेकर पशुपालकों को हो रही है।  चारा न मिलने की वजह से उन्हें परेशानियों   का सामना करना पड़ रहा है। शासन की तरफ से भूसा और चारा का वितरण आज तक नहीं कराया गया है।
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