गाजीपुर। गरीबों, मजलूमों की आवाज स्वतंत्रता सग्राम सेनानी पूर्व सांसद सरजू पांडेय की 30वीं पुण्यतिथि रविवार को सरजू पांडेय पार्क में श्रद्धांजलि सभा के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वह अंग्रेजी दासता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर कूद पड़े थे। वह त्याग-बलिदान की प्रतिमूर्ति थे।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1942 को हजारों के हुजूम के साथ कासिमाबाद थाना फूंककर तिरंगा फहरा दिया था। जेल यात्रा के दौरान वह कम्युनिस्ट बन गए। जमींदारी उन्मूलन एवं सामंती उत्पीड़न के विरुद्ध जुझारू संघर्ष किया। उनके पीछे उत्पीड़ित-शोषित जनता लामबंद हो गई थी। बेदाग चरित्र एवं चमकदार दामन था। वह राजनीति को नि:स्वार्थ भाव से त्याग-तपस्या, समाजसेवा का क्षेत्र मानते थे। किसानों, मजदूरों, दलितों के हित की रक्षा में वह आजीवन लगे रहे। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रत्येक प्रकार के शोषण-जुल्म के खिलाफ लड़ने की चुनौती है, लेकिन दुर्भाग्य से देश में असल सवालों से देशवासियों का ध्यान हटाने के लिए सांप्रदायिक, भावनात्मक, जातिवादी मुद्दे उभारे जा रहे हैं। इस अवसर पर विश्वमोहन शर्मा, रामप्यारे राम, मोती प्रधान, जितेंद्र घोष, सौरभ पांडेय, डा. इकबाल अंसारी, भाकपा के जिला सचिव अमेरिका सिंह यादव, पूर्व विधायक राजेंद्र यादव, डा. रामबदन सिंह, रामअवध, ईश्वरलाल, बृजराज ठाकुर, अरविंद मिश्र, रमेशचंद पाल, रामायण यादव, सुरेंद्र राम, सुरेंद्र यादव, राजेंद्र राय, भानूप्रकाश पांडेय, राम शुक्ला, रामभुवन दुबे, राजदेव यादव, सूबेदार, रामलाल, हृदय नारायण यादव, रामपरीखा आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्षता रामलाल पांडेय तथा संचालन जनार्दन राम ने किया।