करंडा (गाजीपुर)। विकास खंड करंडा के कई गांवों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। धरम्मरपुर ग्राम पंचायत के करकटपुर, बलवंतपुर, कोटिया, सरैया, हंसराजपुर, धरम्मरपुर और टेढ़वा समेत आसपास के गांवों के लोगों ने पानी में आर्सेनिक की अधिक मात्रा होने की आशंका जताते हुए जिलाधिकारी से जांच कराने और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से दूषित पानी के उपयोग के कारण क्षेत्र में त्वचा और पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कई गांवों में हैंडपंप और नलों से निकलने वाला पानी कुछ समय बाद पीला पड़ जाता है और बर्तनों में रखने पर उसमें परत जमने लगती है।
ग्रामीणों के अनुसार करकटपुर में आर्सेनिक की मात्रा 100 पीपीबी से अधिक, बलवंतपुर और कोटिया में 500 पीपीबी तक तथा धरम्मरपुर मुख्य बस्ती में 800 से 1000 पीपीबी तक होने की जानकारी मिली है। हालांकि इन दावों की अभी तक किसी अधिकृत सरकारी जांच रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार पेयजल में आर्सेनिक की सुरक्षित सीमा 10 पीपीबी निर्धारित है।
बीमारियों को लेकर बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 12 हजार की आबादी इसी पानी का उपयोग करने को मजबूर है। लोगों का आरोप है कि इसके सेवन से त्वचा पर काले धब्बे, खुजली, कब्ज, गैस, एसिडिटी समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
सहायक खंड विकास अधिकारी करंडा जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि वीडीओ को भेज कर पेयजल के नमूनों की जांच कराई जाएगी और वह स्वयं भी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जल निगम ने आर्सेनिक मिलने से किया इन्कार
अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण) राजीव कुमार ने बताया कि करीब एक साल पहले करंडा क्षेत्र के पानी के नमूनों की लैब में जांच कराई गई थी, इसमें आर्सेनिक नहीं मिला था। फिर भी ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। ग्रामीण चाहें तो स्वयं भी पानी का नमूना विभाग की प्रयोगशाला में जांच के लिए उपलब्ध करा सकते हैं।
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