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Ghazipur News: पितृपक्ष कल से, पहले दिन होगा प्रतिपदा का तर्पण

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गहमर। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है, जो आठ सितंबर दिन सोमवार से शुरू हो रहा है। पहले दिन प्रतिपदा (प्रथम) तिथि का श्राद्ध तर्पण होगा। इसके एक दिन पहले रविवार को पूर्णिमा का श्राद्ध होगा। इसी दिन खग्रास चंद्र ग्रहण है। दिन में 12:57 से सूतक लग रहा है इसलिए श्राद्ध तर्पण संबंधित कार्य इससे पहले ही कर लेना बेहतर रहेगा। ज्योतिषाचार्य रामाकांत पांडेय, नितिन द्विवेदी, महंत आकाश राज तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए तिथि, वार (दिन) का आधार मध्य दिन के समय पर निर्भर है। इस कारण षष्ठी एवं सप्तमी तिथि का श्राद्ध तर्पण एक ही दिन 13 सितंबर को होगा। अष्टमी का श्राद्ध तर्पण 14 सितंबर को होगा, जो सुबह 8:41 के बाद करना श्रेयस्कर रहेगा। 15 को श्राद्ध तर्पण नवमी तिथि का होगा। साथ ही 21 सितंबर दिन रविवार को सर्वपैत्री अमावस्या श्राद्ध तर्पण के साथ पितृपक्ष का विसर्जन हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य रामाकांत पाण्डेय, नितिन द्विवेदी, महंत आकाश राज तिवारी का कहना है कि जन्म कुंडली में पितृ दोष होने से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पंडित अमरेंद्र कुमार मिश्र का कहना है कि श्राद्ध न करने की स्थिति में आत्मा को पूर्ण रूप से मुक्ति नहीं मिल पाती है, जिससे आत्मा भटकती रहती है। पितृपक्ष में तर्पण व पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
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श्राद्ध की तिथियां -प्रतिपदा (प्रथम) तिथि का श्राद्ध 8 सितंबर दिन सोमवार को, द्वितीया तिथि का श्राद्ध 9 सितंबर, तृतीया तिथि का श्राद्ध 10 सितंबर, चतुर्थी तिथि का श्राद्ध 11 सितंबर, पंचमी तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर, षष्ठी और सप्तमी दोनों तिथि का श्राद्ध 13 सितंबर, अष्टमी तिथि का श्राद्ध 14 सितंबर, नवमी तिथि का श्राद्ध 15 सितंबर, दशमी तिथि का श्राद्ध 16 सितंबर, एकादशी तिथि का श्राद्ध 17 सितंबर, द्वादशी तिथि का श्राद्ध 18 सितंबर, त्रियोदशी तिथि का श्राद्ध 19 सितंबर, चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 20 एवं सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या 21 सितंबर को होगा। इसके अगले दिन सोमवार से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएगा।
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