शनिवार को जनपद की प्रमुख नदी गंगा के साथ ही सहायक नदियां गोमती, बेसो, भैंसहीं, मगई, उदंती भी उफान पर हैं। गंगा के जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी हो रही है। पानी तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रही है। लोग सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। कई गांवों की गलियों और सड़कों पर नाव चलनी शुरू हो गई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है।
शनिवार को नगर के कई हिस्सों में गंगा का पानी घुस गया है। अगर जलस्तर में इसी तरह से वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो नदियां बड़ी तबाही मचा सकती हैं। सायंकाल चार बजे तक गंगा खतरा के निशान 63.105 मीटर से करीब 64.492 मीटर ऊपर बह रही थीं। शनिवार को भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी है। गंगा तट पर स्थित जिलाधिकारी आवास परिसर में भी बाढ़ का पानी फैल गया। नगर के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी घुस जाने से मार्ग डूब गए और दर्जनभर से अधिक घर पानी से घिरे हुए हैं। शहर के तुलसियाका पुल, स्टीमरघाट मार्ग पर बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
नखास मुहल्ला निवासी पूर्व विधायक खुर्शीद अहमद, गोपाल वर्मा, गिरजा राय, मुख्तार कुरैशी, अमीन, अब्दुल हक, मो. जकरिया, मर्तजा सिद्दीकी, कादिर अख्तर, कलीम, आरजू आदि के मकान बाढ़ के पानी से घिर गए। इसके साथ ही शहर के स्टीमरघाट मार्ग पर पानी फैलने से आवागमन करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पानी भरने से स्कूली बच्चे तक बाढ़ के पानी से होकर गुजर रहे हैं। गंगा अब तटवर्ती इलाकों में तबाही मचाने लगी है।
केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी हरिनाथ ने बताया कि गंगा में शनिवार को एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ाव जारी रहा। दिन में दो बजे गंगा खतरा के निशान 63.105 से ऊपर 64.490 मीटर ऊपर बह रही थी। जबकि सायंकाल चार बजे 64.492 मीटर तक पहुंच गया था। गहमर संवाददाता के अनुसार गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने के कारण स्थानीय गांव का हनुमान चौतरा मैदान पूरी तरह से लबालब भर गया है और बाढ़ का पानी गांव के साई का बेर मुहल्ला तथा भैरोराव मुहल्ले में प्रवेश कर गया, जिससे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
गांव का नरवाघाट, बारा गांव का रौजा मोहल्ला, कर्मनाशा तटवर्ती गांव कुतुबपुर, भतौरा और दलपतपुर, सायर, राजमल बांध, देवल आदि गांवों में भी कर्मनाशा नदी का पानी घुस गया है। लोग सामानों के साथ घरों से पलायन कर रहे हैं। कई बाढ़ प्रभावित गांव में नाव की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं।
सुहवल संवाददाता के अनुसार पूरे गंगबरार दियरा इलाके में सैकड़ों रिहायशी पक्के मकान, रिहायशी झोपड़ियां गंगा के पानी से घिर गई हैं।
लोग अभी भी दियरा में जानवरों समेत फंसे हुए हैं। सैकड़ों एकड फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। हसनपुरा, नसीरपुर, बीरऊपुर, रामपुर, टौंगा, गोपालपुर, डेढगावां, उधरनपुर, डोहला, तिलवां, मलसा, गरूआमकसूदपुर, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर ,युवराजपुर, रामपुर, पटकनिया, कल्यानपुर, गोपालपुर तिलवा, बड़ौरा, डारीडीह, बेमुआ, पटखौलियां, ताडीघाट मल्लाह बस्ती पूरी तरह पानी से घिर चुके हैं।
बाढ़ पीड़ित मकानों से जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों के लिए निकलने लगे है। कालूपुर, सुजानपुर, बवाडा, भिक्खिचौरा युवराजपुर, पटकनियां गांव में भी बाढ़ का पानी कभी भी घुस सकता है। युवराजपुर गांव में भी बाढ़ का पानी घुसने लगा है। प्रशासन की तरफ से पशुओं के लिए न तो चारा कि व्यवस्था कि गई है न तो बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अभी तक किसी तरह की सहायता मुहैया कराई गई है। पीड़ितों का कहना है कि कागज पर तो प्रशासन ने बाढ़ शरणालय, राहत केंद्र, स्वास्थ्य चौकी खोल दिया है, लेकिन उसका कोई फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है।